Sunday, Nov 27, 2022
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sfi reaches delhi high court on jrf to fill jnu phd seats

JRF से JNU PHD सीट्स भरे जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा SFI

  • Updated on 7/15/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने संस्थान द्वारा अकादमिक सत्र 2021-22 के लिए सातों केंद्रों की पीएचडी सीट्स को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए रखने के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

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जेएनयू में दाखिले की नीति पिछले वर्ष के अनुरूप नहीं 
याचिका दायर करने वाले वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि जेएनयू में इस वर्ष दाखिले की नीति पिछले वर्षों में दाखिले की नीतियों की अपेक्षा एकदम मनमानी, तर्कहीन, अनुचित व अन्यायपूर्ण है। याचिका में जेएनयू छात्रों ने कहा कि पिछले वर्ष पीएचडी एडमिशन में जेएनयू प्रशासन ने जेआरएफ और नॉन जेआरएफ उम्मीदवारों एंट्रेंस एग्जाम के जरिए सातों केंद्रों की सीटों को भरा था।

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इन 7 केंद्रों की सीटों को जेआरएफ से भरा जाएगा
लेकिन इस अकादमिक सत्र में जो प्रॉस्पेक्टस जारी किया है उसमें 100 फीसद पीएचडी सीट को जेआरएफ से भरने का फैसला लिया गया है। विवि. के 7 केंद्रों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और विकास केंद्र, मानवाधिकार अध्ययन में पीएचडी, अंग्रेजी अध्ययन केंद्र, भारतीय भाषा अध्ययन केंद्र, विधि और अभिशासन अध्ययन केंद्र, आणविक चिकित्सा शास्त्र विशेष केंद्र व महिला अध्ययन केंद्र शामिल हैं।

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कोविड की वजह से पिछले दो यूजीसी नेट एग्जाम समय पर नहीं हो पाए
याचिका में छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी नेट परीक्षा का वर्ष में दो बार आयोजन करता है। जिसके लिए आवेदन की उम्र सीमा मात्र 30 वर्ष तक है। आरक्षित वर्ग के छात्रों को आवेदन में 5 वर्ष तक की छूट मिलती है। कोरोना महामारी के कारण यूजीसी ने पिछले 2 नेट एग्जाम आयोजित नहीं करा पाए हैं।

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नॉन जेआरएफ छात्रों को होता है जेएनयू एंट्रेंस एग्जाम का इंतजार 
ऐसे में जो छात्र नेट परीक्षा के लिए आवेदन कर चुका है और जेएनयू में पीएचडी में दाखिला चाहता है नेट परीक्षा के रिजल्ट से पहले उसे दाखिला नहीं मिलेगा। ऐसे छात्र सिर्फ जेएनयू प्रवेश परीक्षा पर निर्भर होते हैं। जबकि विवि. केवल जेआरएफ के जरिए ही सभी पीएचडी सीटों को भरेगा तो इन छात्रों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है।

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