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शाहीन बाग केस: SC ने कहा प्रदर्शन के दौरान रोड ब्लॉक करना गैरकानूनी

  • Updated on 9/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में दिसंबर 2019 में लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन के केस में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार के मामले में कोई सार्वभौमिक नीति नहीं हो सकती है। परिस्थितियों के अनुरूप संतुलन बनाए रखने के लिए सड़कें अवरुद्ध करने जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए संतुलित कार्रवाई जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा। कोविड-19 महामारी की आशंका और इस वजह से निर्धारित मानदंडों के पालन के दौरान यहां पर स्थिति सामान्य हुई थी। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कुछ परिस्थितियों ने इसमें अहम भूमिका निभाई और यह किसी के हाथ में नहीं था। ईश्वर ने खुद ही इसमें हस्तक्षेप किया।

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बनाना होगा संतुलन
शशांक त्रिवेदी सहित विभिन्न अधिवक्ताओं की दलीलों का संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा हमें विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सड़कें अवरुद्ध करने में संतुलन बनाना होगा। हमें इस मुद्दे पर विचार करना होगा। इसके लिए कोई सार्वभौमिक नीति नहीं हो सकती, क्योंकि मामले दर मामले स्थिति अलग हो सकती है। पीठ ने कहा संसदीय लोकतंत्र में संसद और सड़कों का विरोध प्रदर्शन हो सकता है लेकिन सड़कों पर शांतिपूर्ण रखना होगा।

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100 दिन तक परेशान रहे लोग
इस समस्या को लेकर याचिका दायर करने वाले वकीलों में से एक अमित साहनी ने कहा कि व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इस तरह के विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा इसे 100 दिन से भी ज्यादा चलने दिया गया और लोगों को इससे बहुत तकलीफ हुई। इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए।

पीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि उसने प्रयोग के तौर पर बातचीत के लिए नियुक्तियां की थी और उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं। जिन पर गौर किया जा सकता है पीठ ने कहा कि मध्यस्थता के लिए लोगों को भेजने का प्रयोग सफल भी हो सकता था और नहीं भी, लेकिन कोविड-19 महामारी का भी इस स्थिति पर प्रभाव हो सकता है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विरोध करने का अधिकार निर्धारित नहीं है।

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