Sunday, Nov 28, 2021
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भारतीय इंजीनियर ने खोज निकाला विक्रम का मलवा, जानें पूरी कहानी

  • Updated on 12/3/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। अमेरिकी स्पेस रिसर्च एजेंसी (NASA) ने विक्रम लैंडर (Vikram Lander) के मलवे के पाए जाने की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी कर दिया है। जब चांद के साउथ पोल की तस्वीरे जारी की तब चेन्नई के इंजीनियर शानमुगा सुब्रमण्यन (Shanmuga Subramanian) ने इन तस्वीरों पर जमकर मेहतन की और दुर्घटनाग्रस्त हुए चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के मलवे का पता लगा लिया।

जिसके बाद शानमुगा ने नासा के एलआरओ प्रोजेक्ट (LRO Project) को मलबे मिलने के बारे में बताया तो एलआरओ टीम ने पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर विक्रम के मलबे मिलने की पुष्टि की। नासा ने इस सहयोग के लिए शानमुगा की तारिफ की।

नासा ने बताया कि इन मलबों को सबसे पहले शाणमुगा ने उस जगह से लगभग 750 मीटर दूर ढूंढ निकाला जहां वो गिरा था। और ये उसकी एक मात्र स्पष्ट तस्वीर थी। 

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मदुरै शहर के रहने वाले हैं शानमुगा
33 साल के शानमुगा मकैनिकल इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं। और वह मदुरै शहर के रहने वाले हैं और अभी चेन्नई में रहते हैं। विक्रम के मलवे का पता लगाने वाले शानमुगा सुब्रमण्यन ने नासा के एलान के बाद ट्वीट कर अपने बारे में जानकारी दी। 

उन्होंने अपने परिचय में लिखा कि 'नासा ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर को खोजने के लिए मुझे श्रेय दिया है। उन्होंने लिखा कि मेरे बारे में कोई नहीं जानता, उन्होंने बताया कि फिलहाल वे चेन्नई में लेनॉक्स इंडिया टेक्नॉलजी सेंटर में टेक्निकल आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। 

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2.1 किलोमीटर दूर पहले विक्रम से टूटा था संपर्क
दरअसल चंद्रयान-2 मिशन के तहत विक्रम लैंडर को सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाना था। लेकिन 47 दिन की यात्रा के बाद लैंडिंग के थोड़ी देर पहले 2.1 किलोमीटर दूर पहले इसरो से उसका संपर्क टूट गया।

जिसके बाद विक्रम लैंडर के बारे में कुछ नहीं पता चल रहा था। इसी दौरान नासा का एलआरओ प्रोजेक्ट यान सितंबर से ही कई बार उस जगह के उपर से गुजरा था लेकिन विक्रम की कोई साफ तस्वीर नहीं मिल पा रही थी। 

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शानमुगा ने खोजा विक्रम 
जिसके बाद अब शानमुगा ने विक्रम के मलबे का पता लगाया। इनके खोज की पुष्टि करते हुए नासा के डेप्युटी प्रॉजेक्ट साइंटिस्ट जॉन केरल ने शानमुगा को लिखा, विक्रम लैंडर के मलवे की खोज के संबंध में आपके ईमेल के लिए सुक्रिया, एलआरओसी टीम ने कंफर्म किया है कि बताई गई लोकेशन पर लैंडिंग से पहले और बाद में बदलाव दिख रहा है। जांच करने पर मलवा भी मिला है। नासा और एएसयू ने इस बारे में घोषणा के साथ-साथ आपको क्रेडिट भी दिया है। 

शानमुगा को बधाई देते हुए जॉन केलर ने आगे लिखा है कि आपने जो इतनी मेहनत और समय लगाकर जो काम किया उसके लिए बधाई। हम ज्यादा समय लेने के लिए माफी चाहते हैं क्योंकि हमें इसके एलान के लिए पूरी तरह से संतुष्ट होना था।

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