Thursday, Feb 27, 2020
sharad pawar ncp angry with uddhav thackeray govt decision on bhima koregaon case maharashtra

शरद पवार भीमा कोरेगांव मामले पर उद्धव ठाकरे सरकार के फैसले से खफा

  • Updated on 2/15/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार में एक बार फिर से मनमुटाव सामने आया है। इस बार राकांपा नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सवाल उठाए हैं जिसमें महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि एल्गार परिषद (भीमा कोरेगांव) मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) द्वारा अपने हाथ में लेने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। शरद पवार ने कहा कि केन्द्र का इस तरह से राज्य के हाथों से जांच लेना गलत है और महाराष्ट्र सरकार द्वारा उसके फैसले का समर्थन करना भी गलत है। 

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केन्द्र का जांच लेना व राज्य सरकार का समर्थन गलत
भीमा कोरेगांव मामले की जांच पुणे पुलिस से एन.आई.ए. को हस्तांतरित करने पर राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस में कुछ लोगों का व्यवहार (भीमा कोरेगांव जांच में शामिल) आपत्तिजनक था। मैं चाहता था कि इन अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।

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उन्होंने कहा कि सुबह पुलिस अधिकारियों के साथ महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों की बैठक हुई थी और दोपहर 3 बजे केंद्र ने मामले को एन.आई.ए. को हस्तांतरित करने का आदेश दिया। यह संविधान अनुसार गलत है, क्योंकि अपराध की जांच राज्य का अधिकार क्षेत्र है। केंद्र ने पिछले महीने मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर एन.आई.ए. को सौंप दी थी। 

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एनआईए ने निचली अदालत में दाखिल की थी याचिका
एन.आई.ए. ने पिछले सप्ताह पुणे की एक निचली अदालत में एक आवेदन कर मामले से जुड़े दस्तावेजों, जब्त किए गए डाटा और अदालती कार्रवाई के दस्तावेजों को मुम्बई में एन.आई.ए. की विशेष अदालत को सौंपे जाने का अनुरोध किया था। हालांकि, उस समय बचाव पक्ष ने एन.आई.ए. के आवेदन का विरोध किया था।

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नवलखा और तेलतुंबडे को अग्रिम जमानत से इनकार
बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद के कथित माओवादी संपर्क मामले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को अग्रिम जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया साक्ष्य से मामले में दोनों आरोपियों की सहभागिता प्रदर्शित होती है। हालांकि, अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी, ताकि वे उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकें। 

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