Thursday, Jun 24, 2021
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Shardiya Navratri 2020 With this mantra worship the fourth form of Mother Durga

Shardiya Navratri 2020: इस विधि और मंत्रों से करें मां कुष्मांडा की पूजा, मनोकामनाएं होंगी पूरी

  • Updated on 10/19/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की पूजा होती है। मान्यताओं के अमुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब कूष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। कूष्माण्डा देवी को स्वरूपा, आदिशक्ति कहा जाता हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के अंदर लोक में है इस स्थान पर निवास कर करने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। मां कूष्माण्डा के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं की छाया है। मान्यता है कि पूर्ण विधि से मां कूष्माण्डा देवी की पूजा करने से मां सभी भक्तों के मनोकामना पूरी करती हैं।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुबह स्नान कर लें, इसके बाद मां कूष्मांडा का स्मरण करके उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। फिर मां कूष्मांडा को हलवा और दही का भोग लगाएं और उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें और अपनी मनोकामना उनसे व्यक्त कर दें।

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मां कूष्माण्डा की पूजा करते समय आप मंत्रों का जाप करेंगे उससे मां प्रसन्न होंगी। 

1. या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..

2. वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्.
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

3. दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्.
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

4. जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

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माँ कूष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं. अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है।
 

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