Sunday, Nov 28, 2021
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केजरीवाल के 'मुस्लिम वोट शिफ्ट' वाले बयान पर भड़कीं शीला दीक्षित, कही ये बात

  • Updated on 5/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकसभा चुनाव की वोटिंग से ऐन पहले मुस्लिम वोटर्स को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा कही गई बात से भड़की शीला दीक्षित ने कहा है कि दिल्ली की जनता न तो इस सरकार के कामकाज को समझ पा रही है न ही केजवाल की बातों को।

एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा कि 48 घंटे पहले हम दिल्ली की सातों सीट जीत रहे थे लेकिन 12 मई को वोटिंग से ठीक एक दिन पहले दिल्ली का पूरा मुस्लिम वोट कांग्रेस को शिफ्ट हो गया। हालांकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि पब्लिक काम के आधार पर उन्हीं की पार्टी को दोबारा मौका देगी। 

केजरीवाल के मंत्री ने कहा- कन्फ्यूजन में मुस्लिमों ने AAP के बदले कांग्रेस को दिए वोट

केजरीवाल के इस बयान पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की नेता शीला दीक्षित ने कहा कि ऐसा बोल कर केजरीवाल क्या कहना चाह रहे हैं समझ नहीं आता। यह जनता का अधिकार है कि वह किस पार्टी या व्यक्ति को वोट देना चाहती है। आज तक दिल्ली के लोग न तो केजरीवाल को समझ सकी है नही इनके कामकाज को पसंद करती है। 

इससे पहले केजरीवाल सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि आम आदमी पार्टी दिल्ली की सभी सातों सीटों पर चुनाव जीत रही थी। लेकिन कुछ मुस्लिम वोटर कन्फ्यूज होकर कांग्रेस के पाले में चले गए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि मतदान से 2 रात पहले गरीब वोटरों को पैसे बांटे गए हैं। जिसके चलते भी वोट ट्रांसफर हुए हैं। बता दें कि राजेन्द्र पाल गौतम उत्तरी-पूर्वी दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा से विधायक भी हैं। 

दिल्ली में 12 मई को सभी सातों सीटों पर मतदान हुआ था। जिसमें कुल 60.52 फीसदी मतदान किया गया। इसके अलावा दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों में उत्तरी पूर्वी दिल्ली की लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 63.39 फीसदी  मतदान हुआ। बताया जा रहा है कि इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी है। यहां करीब 23 फीसदी मुस्लिम है। 

वोटिंग से पहले कांग्रेस-AAP में गठबंधन की लंबी कवायद के बाद में दिल्ली के रण में दोनों पार्टियों को प्रतिद्वंद्वी के तौर पर ही उतरना पड़ा। देखते-देखते वह दिन भी आ गया जब जनता अपने पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में बटन दबाया। लंबे चुना प्रचार के बाद भी अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि मुस्लिम मतदाता ने किस पार्टी को समर्थन दिया है।

आप और कांग्रेस ने सातों सीटों पर इन मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए पूरी मेहनत की है। एक बात तय है यदि दोनों दलों के बीच मुस्लिम मतों का विभाजन हुआ तो उसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। दिल्ली की राजनीति के जानकारों की मानें तो दिल्ली में चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई मुस्लिम बहुल इलाके हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लाखों में हैं।

गत 15 साल के दौरान जब तक दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार रही तो इन इलाकों में कांग्रेस का कब्जा था लेकिन 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा के चुनाव में इन इलाकों में एकदम बदलाव आ गया और अधिकांश मुस्लिम बहुल इलाकों में आम आदमी पार्टी ने विजय हासिल की थी।

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