Friday, Mar 05, 2021
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shiromani akali dal says after arun jaitley no one in bjp to understands punjab rkdsnt

शिरोमणि अकाली दल बोली- अरुण जेटली के बाद, BJP में पंजाब को समझने वाला कोई नहीं

  • Updated on 9/27/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कृषि विधेयकों पर विरोध को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने की शिरोमणि अकाली दल (SAD) की घोषणा के एक दिन बाद पार्टी नेता नरेश गुजराल ने रविवार को कहा कि अरुण जेटली (Arun Jaitley) के निधन के बाद पंजाब के मानस को समझने वाला कोई नेता भाजपा में नहीं हैं। अकाली दल के राज्यसभा सदस्य गुजराल ने उम्मीद जतायी कि केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार पंजाब में स्थिति से निपटने में कुछ संवेदनशीलता दिखाएगी। 

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गुजराल ने कहा कि गठबंधन से अलग होने का फैसला पार्टी कैडर से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर किया गया था। उन्होंने कहा कि कैडर-आधारित पार्टी होने के नाते अकाली दल उनकी इच्छाओं का सम्मान करता है। भाजपा के साथ लंबे जुड़ाव के संबंध में उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, अरुण जी (पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली) के निधन के बाद, पंजाब के मानस को समझने वाला भाजपा में कोई नहीं है।’’ 

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गुजराल ने कहा कि पंजाब में सभी तबकों के लोग कृषि संबंधी विधेयकों के मुद्दे पर काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि स्थिति के हाथ से निकल जाने के पहले इस अंतिम चरण में भी केंद्र, पंजाब की स्थिति से निपटने में थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएगा।’’     एक अन्य वरिष्ठ अकाली नेता बलविंदर सिंह भुंडर ने कहा कि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन चार दशकों तक जारी रहा लेकिन अब समीकरण बदल गया है। 

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उन्होंने कहा, Þहम कांग्रेस के अत्याचारों के खिलाफ लडऩे के लिए एक साथ आए। किसानों और पंजाब के मुद्दों पर हमेशा अकाली दल से सलाह ली गयी। लेकिन अब भाजपा किसानों से संबंधित मुद्दों और पंजाब के बारे में हमारी ङ्क्षचताओं को नहीं सुनती।’’ उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के विपरीत मौजूदा राजग में सहयोगियों को बहुत महत्व नहीं दिया गया है।

शिवसेना ने राजग छोड़ने पर शिअद की सराहना की
शिवसेना ने किसानों के हितों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होने पर शिरोमणि अकाली दल की रविवार को सराहना की। हालांकि पार्टी सांसद संजय राउत ने यह भी कहा कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का राजग से अलग होने का फैसला दुखद घटनाक्रम है। शिअद ने शनिवार रात को राजग से अपने संबंध तोडऩे की घोषणा की। वह हाल के वर्षों में भाजपा की अगुवाई वाले राजग से अलग होने वाली तीसरी बड़ी पार्टी है। इससे पहले शिवसेना और तेदेपा भी राजग से अलग हो चुकी हैं। 

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गत वर्ष शिवसेना ने महाराष्ट्र में सत्ता साझेदारी के मुद्दे पर भाजपा से टकराव के बाद राजग को अलविदा कह दिया था। शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता रावत ने ट्वीट किया, 'शिवसेना किसानों के हित में राजग से अपने रिश्ते तोडऩे के अकाली दल के फैसले की सराहना करती है।' इससे पहले यहां पत्रकारों से मुखातिब होते हुए राउत ने कहा था कि शिवसेना और शिअद राजग के स्तंभ थे। 

 

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