Wednesday, Oct 16, 2019
shopkeepers-having-fun-in-isbt-even-after-the-lease-ends

आईएसबीटी में लीज खत्म होने के बाद भी मौज कर रहे दुकानदार

  • Updated on 10/8/2019

देहरादून/ब्यूरो। देहरादून का आईएसबीटी (ISBT) उत्तराखंड का एकमात्र बीओटी यानि बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर प्रोजेक्ट है। लेकिन साठगांठ के खेल ने बीओटी के इस मॉडल को भी फेल कर दिया है। आलम ये है कि आईएसबीटी के अधिकांश दुकानदारों की लीज खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद प्रबंधन से जुगाड़ बैठाकर दुकानदार चांदी काटने में लगे हैं। स्थानीय प्रबंधन की जेब भी गरम की जा रही है। हैरत की बात यह है कि लीज खत्म होने के इस खेल से एमडीडीए से लेकर कंपनी का हैदराबाद प्रबंधन तक अनभिज्ञ है जिसका स्थानीय स्तर पर जमकर लाभ उठाया जा रहा है।    

17 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे बद्रीनाथ मन्दिर के कपाट

एनडी तिवारी सरकार ने वर्ष 2003 में राजधानी देहरादून में रैमकी के साथ बीओटी मॉडल में आईएसबीटी को विकसित किया था। राज्य सरकार की जमीन पर कंपनी को इसके निर्माण, संचालन और फिर इसे पुन: सरकार को ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी दी गई थी। 2003 से आगामी 20 वर्षों के लिए कंपनी से वर्ष 2023 तक के लिए अनुबंध हुआ। शुरुआत में आईएसबीटी निर्माण पर कुल 19 करोड़ रुपये का खर्च आंका गया, लेकिन वर्ष 2011 तक परियोजना में मॉल और अन्य कार्य जुड़ जाने पर पूरे प्रोजेक्ट की कीमत 52 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत सहित 25 नेताओं को कोर्ट से राहत आस

इधर, आईएसबीटी के अंदर कंपनी ने दुकानदारों को 15 साल की लीज पर वर्ष 2004 में दुकानें दीं, लेकिन इनमें से अधिकांश की लीज इस साल खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक दुकानदार मौज काट रहे हैं। कुल मिलाकर अगले चार साल तक लीज के इस खेल को बगैर एक पैसा चुकाए यों ही चलाते रहने की तैयारी अंदरखाने चल रही है। कई दुकानदार ऐसे भी हैं, जो दुकानों को बेच चुके हैं और अदालतों में मामले लंबित हैं।

अब ऐसे खो रहा खेल
लीज खत्म होने के बाद कायदे से दुकानदारों से कंपनी को नए सिरे से अनुबंध करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उल्टे दुकानदारों ने ये दुकानें किराये पर चढ़ा दी हैं। बाकायदा 2023 तक का एकमुश्त किराया नए दुकानदारों से अवैध रूप से वसूला जा रहा है। लीज के नाम पर कंपनी को मामूली रकम दी गई, जबकि दुकानदार दुकानों का मोटा किराया वसूलते हैं। रैमकी के प्रबंधक बीएस नेगी का कहना है कि जिन दुकानदारों की लीज खत्म हो गई है, उनसे इस बाबत तकाजा किया जा रहा है। साथ ही हैदराबाद में भी कंपनी मुख्यालय से आगे अनुबंध के बाबत डायरेक्शन मांगे गए हैं। उधर, एमडीडीए सचिव जीसी गुणवंत का कहना है कि यह कंपनी और दुकानदारों के बीच का मामला है। फिर भी एमडीडीए स्तर से इस खेल के बारे में पता कराया जाएगा।

आईएसबीटी के अंदर दुकानदार सिंडिकेट
आईएसबीटी के अंदर दुकानदारों का बाकायदा सिंडिकेट बना हुआ है। कुछ दुकानदार तमाम हथकंडे अपनाकर दुकानों पर अपना कब्जा बनाए हुए हैं, तो प्रबंधन की कमी के चलते उसे भी दबाव में लिया जाता है। प्रबंधन की अपनी कमियों के चलते भी वह अक्सर दबाव में रहता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.