Tuesday, Nov 30, 2021
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Show love and respect to loved ones in time, not after they are gone: Morari Bapu

प्रियजनों के प्रति समय रहते जताएं प्यार और सम्मान, जाने के बाद नहीं : मोरारी बापू

  • Updated on 11/18/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जिनसे हम प्यार करते हैं उनके जाने के बाद ऐसा कहने लगते हैं कि वे अ'छे थे। हम उनके वस्त्रों और उनसे जुड़े सामानों में श्रद्धा प्यार जताते लग जाते हैं। पर ये सब हमारे मन की चालाकियां ही होती हैं। खुद को धोखा देने की कोशिश होती है पर हमें पुराने को संभालना अच्छा लगता है। फिर उनकी तस्वीर की पूजा और दूसरी चीजें शुरू हो जाती हैं। पर उनके रहते उस वर्तमान को हम चूक जाते हैं। हमे तो उसका समय रहते सम्मान करना चाहिए था। समय रहते उन्हें प्यार देना चाहिए था। पर अक्सर होता जरा उलट है। इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए। यह सीख दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में हो रही मानस साधु चरित मानस राम कथा में संत मोरारी बाबू ने कही।

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सत्य का बोध हो जाने के कारण साधु में नहीं होता क्रोध 
उन्होंने साधुओं को लेकर लोगों के बीच सूक्ष्म बोध कराते हुए कहा कि साधु अहंकार और मान-मनौवल के बनावटी लक्षणों से खुद को बहुत दूर रखता है। साधु में क्रोध तो होता ही नहीं है क्योंकि उसे जगत के सत्य का बोध हो चुका होता है। उसके अन्तर्मन में भी क्रोध का लेशमात्र नहीं होता। न उसके मन में कु छ पाने से हर्ष होता है न कु छ खो जाने का शोक। उन्होंने कहा कि संत हृदय नवनीत समाना अर्थात साधु एकदम कोमल चित्त होता है। जो समता में जीये वह साधु। उसके लिए न कोई अपना न पराया। जिसके लिए दुनिया में कोई दुश्मन है ही नही, साधु वही है। सामने वाला उनसे दुश्मनी रखे यह हो सकता है। पर, उनके मन मे किसी के प्रति शत्रुभाव नही होता।

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राम नाम है वेदों का सार 
साधु स्वभाव हो जाये तो धीरे-धीरे हमारे जीवन में भी ऐसा हो सकता है। कुछ लोग माया वाली भक्ति करते हैं। पर सच्चा साधु नहीं। उन्होंने राम शब्द के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या की। राम नाम को उन्होंने वेदों का सार बताया। उन्होंने कहा कि लोग जीवन भर किसी और को राजी करने में लगे रहते हैं राजी करना ही है तो राघव को राजी करें। यह नाम अत्यंत पवित्र और परमतत्व का नाम है। बता दें श्रोता इस कथा का लाइव प्रसारण आस्था टीवी चैनल पर देख सकते हैं कथा अगले 3 दिन और जारी रहेगी।

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