Friday, May 27, 2022
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संस्कृति मंत्रालय की झांकी में दिखा श्री अरविंद की जीवन यात्रा

  • Updated on 1/27/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। नई दिल्ली संस्कृति मंत्रालय द्वारा 73वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में श्री अरविंद के जन्म के 150 वर्ष पूरे होने पर झांकी के माध्यम से उनके जीवन और दर्शन को प्रस्तुत करती दिखी। इस झांकी की विशिष्टा श्री अरविंद की जीवन यात्रा के माध्यम से व्यक्तिगत चेतना को अध्यात्मिक चेतना से जोडने का प्रयास किया गया।
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श्री अरविंद दिखे श्रीमां के संग
मालूम हो कि 15 अगस्त 1872 में जन्में श्री अरविंद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अग्रणी आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक, योगी, महर्षि एवं कवि थे। उन्होंने अपने राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता सेनानी मानस से भारत की परिकल्पना आत्मा के रूप में की एवं त्रिस्तरीय दृष्टिकोण प्रदान किया वो थे स्वराज, स्वदेशी एवं बहिष्कार। वह वंदेमातरम् जैसे समाचार पत्र का संपादन करने वाले पत्रकार थे। जब वे कारागार में थे तो उन्हें एक आलौकिक एवं आध्यात्मिक अनुभूति हुई, जिससे वो धीरे-धीरे एक आध्यात्मिक सुधारक बन गए और उन्होंने मानव विकास एवं आध्यात्मिक आविर्भाव पर अपना दर्शन प्रस्तुत किया। उनकी आध्यात्मिक सहयोगिनी मीरा अल्फासा थीं, जिन्हें दीमदर अथवा श्रीमां के नाम से संबोधित किया जाता है। ेझांकी के अग्रिम भाग में श्री अरविंद की प्रतिमा ओरोविल में मातृमंदिर एवं बोधि वृक्ष दर्शाया गया। जबकि मध्यभाग में श्री अरविंद के जीवन की उन महत्वपूर्ण घटनाओं का सांकेतिक चित्रण देखने को मिला जिसमें वो राजनैतिक नेता से आध्यात्मिक गुरू और एक प्रखर दार्शनिक लेखक बने। झाकीं का अंतिम भाग में पुदुच्चेरी में प्रतिष्ठित श्री अरविंद आश्रम में श्री अरविंद और श्रीमां की दिव्य उपस्थिति और उनकी परिकल्पना में भारतमाता की आकृति दर्शाई गई। 

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