Monday, Jan 21, 2019

धरती पर शांति...

  • Updated on 12/28/2018

लगभग 100 वर्ष पूर्व लड़ाइयां युद्ध के मैदान पर लड़ी जाती थीं, व्यक्ति मारे जाते थे और यदि वे भाग्यशाली होते तो जीवित घर लौट पाते लेकिन बिना किसी बाजू, टांग के और यहां तक कि बिगड़े हुए चेहरे के साथ। इसके साथ ही वे अपने दिमाग में डर तथा सदमा भी लाते, जो कई बार उनसे दूर नहीं जाता तथा उनके द्वारा देखे गए खौफनाक दृश्यों से उन्हें राहत नहीं दिलाता।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब जर्मनी तथा इंगलैंड की सेनाएं लड़ रही थीं, एक-दूसरे पर निर्दयतापूर्वक जानलेवा जख्म दे रही थीं, युद्ध के मैदान में क्रिसमस का सूर्य उदय हुआ तथा दोनों सेनाओं ने युद्धविराम का निर्णय किया।

अचानक जर्मन पक्ष की तरफ से क्रिसमस कैरोल गाने की आवाज सुनाई दी तथा खंदकों से निकल कर सैनिक सफेद झंडों के साथ इंगलैंड की सेना के पास पहुंच गए। ब्रिटिशर बहुत हैरान हुए और एक पल के लिए उनके दिमाग में आया कि कहीं यह कोई चाल तो नहीं। फिर वे बाहर निकले और चल कर वहां पहुंचे, जहां जर्मन प्रतीक्षा कर रहे थे।

शीघ्र ही दोनों पक्षों के सैनिक मिले, एक-दूसरे को गले लगाया, आपस में उपहारों का आदान-प्रदान किया तथा सारा दिन मिलकर कैरोल गाए और यहां तक कि प्रार्थना भी की।यह शांति का एक शानदार समय था।एक बार फिर वर्ष का लगभग वही समय है और झगड़ों में लिप्त एक देश के लिए क्या मैं ये शब्द कह सकता हूं, ‘‘शांति के लिए हम एक साथ हों!’’

अगले सप्ताह के दौरान हम अपने पड़ोसी और यहां तक कि अपने पड़ोसी देशों को भाइयों तथा बहनों के तौर पर देखें, न कि अजनबी की तरह। यदि दो युद्धरत सेनाओं, जिन्होंने एक-दूसरे को पूरी तरह से अलग कर लिया है क्योंकि उनके नेताओं ने उन्हें ऐसा करने को कहा था, चाहे कुछ घंटे पहले तक ही उन्होंने भीषण लड़ाई लड़ी थी, यहां तक कि दूसरी सेना द्वारा अपने कामरेड्स को मारे जाते देखा था तो फिर क्या चीज हमें वैसी ही शांति में सिमटने से रोकती है?

एक पल के लिए ध्यान दें तो पाएंगे कि ये विभाजन राजनीतिक नेताओं द्वारा बड़ी चालाकी तथा सावधानीपूर्वक पैदा किया गया है ताकि वे खुद को ऊपर उठा सकें। 

यहां तक कि जब हमारी आंखें चरनी में लेटे हुए उस बच्चे को देखती हैं तो याद करें कि तीन समझदार व्यक्ति, जिन्हें गुरुजी के तौर पर जाना गया, पूर्व से आए थे, सम्भवत: बच्चे को देखने के लिए भारत से, जिसका अर्थ यह हुआ कि यह छोटा बच्चा सारी दुनिया में शांति लाने के लिए था।तो उसे ऐसा करने दें।

इस सप्ताह क्रिसमस के दिनों दौरान शांति का एहसास करें और शांति को हमारे दिलों तथा मनों को इतना बदलने दें कि हम अपने गुस्से तथा नफरत को एक ओर रख दें तथा जर्मन्स की तरह मानव निर्मित अवरोधों से आगे बढ़कर अपने दुश्मनों को गले लगाएं।

और फिर बाद में हम अपनी तरफ वापस जाकर झगड़े को पुनर्जीवित न करें, बल्कि इसे एक ही बार में सबके लिए समाप्त करें तथा सच्चे भाइयों तथा बहनों की तरह शांति से रहें। इस क्रिसमस सप्ताह को धरती पर शांति की एक नई शुरूआत बनाएं।                                                                                                                              ---राबर्ट क्लीमैंट्स

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.