1984 सिख दंगों की जांच के लिए बनी SIT, पूर्व DGP की अगुवाई में जांच

  • Updated on 2/6/2019

नई दिल्ली/(सुनील पाण्डेय)। 1984 सिख दंगों के दौरान कानपुर में मारे गए 127 सिखों के कत्ल मामले की जांच अब एसआईटी करेगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गृहमंत्रालय के सांप्रदायिकता नियंत्रण प्रकोष्ठ के द्वारा इस एसआईटी का गठन किया गया है। यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अतुल एसआईटी प्रमुख होंगे। उनके अलावा 3 सदस्य और रहेंगे। 

इस एसआईटी के बनवाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से दखल दिया है। इस फैसले से सिखों में एक बार और बड़ी उम्मीद जगी है। कानपुर में मारे गए सिखों के कातिलों को सजा दिलवाने के लिए अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भेागल तथा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने सुप्रीम कोर्ट में यूपी पुलिस द्वारा जांच के बाद बंद किए गए मामलों को पुन: खोलवाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। 

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पिछले 3 साल से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। लेकिन अभी तक यूपी सरकार की तरफ से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया था। कुछ दिनों पूर्व प्रधानमंत्री आवास पर गुरु गोविंद सिंह जी के 350 वें प्रकाश पर्व को समर्पित कार्यक्रम के दौरान भोगल ने इस मामले में यूपी सरकार द्वारा बरती जा रही ढिलाई की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया था। 

इसके बाद यूपी प्रशासन ने आनन फानन में तेजी से कार्रवाई करते हुए कल देर शाम मुख्य सचिव के हस्ताक्षर पर एसआईटी बनाने का आदेश जारी कर दिया। यह एसआईटी बंद हुए केसों की जांच के साथ ही इस मामले में मौजूद गवाहों के बयान दर्ज करके मामलों के आगे चलने के बारे में फैसला लेगी। एसआईटी का कार्यकाल 6 महीने के लिए निर्धारित किया गया है। 

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कानपुर दंगों के 20 गवाह उनके संपर्क में हैं : भोगल 
इस बड़े फैसले की बावत शिरोमणि अकाली दल से बागी हुए राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा और अकाली नेता कुलदीप सिंह भोगल ने एसआईटी बनाने के लिए प्रधानमंत्री, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया। भोगल ने बताया कि उनके पास 20 गवाह हैं, जो कि इस मामले में अहम कड़ी साहित हो सकते हैं। 

इनमें से कुछ गवाह दंगों के बाद पंजाब और हरियाणा में आकर बस गए हैं। आरटीआई के माध्यम से हमने बंद हुई एफआईआर और संभाविंत अभियुक्तों की जानकारी पहले से ही निकाल रखी है। इसलिए कानपुर के मामले में भी दोषियों को सजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भोगल ने कहा कि वह जल्द ही कानपुर जाकर इस मामले के गवाहों से मिलेंगे और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए लड़ाई शुरू करेंगे। 

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1984 सिख दंगों पर बनी तीसरी एसआईटी
1984  सिख दंगों के मामले में केंद्र सरकार ने पहली बार 2015 में एसआईटी बनाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले साल 2018 में एक अन्य एसआईटी बनाई। अब कानपुर के मामले में तीसरी एसआईटी का गठन किया गया है। सिख दंगों में देशभर में सैकड़ों लोग मारे गए थे, जिसमें सिर्फ दिल्ली में 2733 लोगों के मारे जाने का आधिकारिक आंकड़ा है। 

इसके बाद दंगा प्रभावित शहरों में यूपी का कानपुर और झारखंड का बोकारो शहर शामिल था। दिल्ली में हुए सिख दंगों के एक मामले में अब तक 1 आरोपी को सजा-ए-मौत व एक को आजीवन कारावास की सजा हुई है। जबकि दूसरी ओर कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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