Saturday, Apr 17, 2021
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सीताराम येचुरी बोले- केंद्र के आर्थिक पैकेज में मिलीं सिर्फ लोन स्कीम, लेकिन करना ये था...

  • Updated on 5/14/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना संकट के मुद्देनजर केंद्र की मोदी सरकार ने भले ही 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के ऐलान कर दिया हो, लेकिन प्रवासी मजदूरों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज आर्थिक पैकेज पर अपनी दूसरी प्रेस वार्ता में मजदूरों और किसानों के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया। लेकिन, इस पैकेज को लेक भी विपक्ष खुश नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार पुरानी योजनाओं को नए रूप में पेश कर लोगों को मूर्ख बना रही है। इसके साथ ही राहत पैकेज में लोगों को लोन के तले दबाने की कोशिश की जा रही है। 

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वामदल नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि कोरोना संकट में केंद्र सरकार की योजनाएं कुछ नहीं सिर्फ कर्ज देने की स्कीम साबित हो रही हैं। अपने ट्वीट में वह लिखते हैं, 'जो पैकेज से हमें मिला वह सिर्फ लोन स्कीम हैं, कोई राहत नहीं। इनमें से अधिकतर पुरानी हैं। दरअसल ये पुरानी योजनाओं की एक री-पैकेजिंग मात्र है। इसे अपमान ही कहा जाएगा।'

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येचुरी का मानना है कि सरकार को किसानों और मजदूरों को राहत देने के लिए कुछ ठोस उपाय करने थे। उन्होंने बताया कि सरकार को सबसे पहले किसानों का एक बार कर्ज माफ कर देना चाहिए था। दूसरे अगले तीन महीने लिए हर महीने गरीबों के खाते में 7500 रुपये पहुंचाने चाहिए।

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वामदल नेता आगे कहते हैं कि सरकार को गरीबों को अगले छह महीने परिवार के सदस्य के मुताबिक 10 किलो अनाज वितरित करना चाहिए। प्रवासी मजदूरों की परेशानियों को खत्म करने के लिए फ्री परिवहन की व्यवस्था करनी चाहिए। आज का पैकेज क्रूर प्रहार है। कुछ भी नहीं किया गया।

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इसके साथ ही येचुरी ने केरल को लेकर भी ट्वीट किया है। वह लिखते हैं, 'दुनिया में केरल मॉडल की सफलता को सराहा जा रहा है और इसका अनुकरण करने की अपील की जा रही है। लेकिन, मोदी सरकार इसे नहीं देखने का बहाना बनाए हुए है। यह केरल की एलडीएफ सरकार ये काम कर सकती है तो केंद्र क्यों नहीं कर सकती। राज्यों को महामारी रोकने के लिए वित्तीय सहायता की दरकार है।'

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