Wednesday, May 12, 2021
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sitaram yechury demand 100 mps to write letter to president to remove jnu vc

माकपा नेता ने उठाई मांग, जेएनयू के VC को हटाने के लिए 100 सांसद लिखें राष्ट्रपति को पत्र

  • Updated on 1/8/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सीपीआईएम (CPI(M)) के महासचिव सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कुलपति एम जगदीश कुमार (M Jagadesh Kumar) को हटाने की मांग की है। माकपा नेता ने विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ और छात्र संघ द्वारा आयोजित बैठक को संबोधित करते कहा कि वह कुलपति के खिलाफ करीब 100 सांसद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) को पत्र लिखेंगे।

कुलपति को हटाने की मांग
येचुरी ने कहा, "संसद के कई सदस्यों, करीब 100 से संपर्क किया गया है और उन्होंने राष्ट्रपति जो कि विश्वविद्यालय के विजिटर भी हैं, उन्हें पत्र लिखने का फैसला किया है जिसमें कुलपति को हटाने का अनुरोध किया जाएगा।"

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वीसी की अपील के बावजूद प्रदर्शन जारी
जेएनयू कैंपस में रविवार को छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमले को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और छात्रों से बीती बात भूलने की अपील की लेकिन पांच जनवरी को नकाबपोशों के हमले के दौरान अधिकारियों द्वारा देर से कदम उठाए जाने के आरोपों पर गोलमोल जवाब दिया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, "अगर कानून-व्यवस्था की कोई समस्या है तो हम तत्काल पुलिस के पास नहीं जाते हैं। हम देखते हैं कि हमारे सुरक्षा गार्ड इससे निपट सकते हैं या नहीं। रविवार को, जब हमने देखा कि छात्रों के बीच आक्रामक व्यवहार की संभावना है तो हमने पुलिस को सूचित किया।" जेएनयू में हुए हमले के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे, जहां छात्र संघ ने आरोप लगाया कि प्राथमिकियां दिखाती हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ मिला हुआ है। हिंसा के लिए वाम संबद्ध संगठनों और एबीवीपी ने एक-दूसरे पर आरोप लगाया है।

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Left ने केंद्र के खिलाफ लगाए नारे
विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की बैठक में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने हिंसा को लेकर केंद्र पर हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार संविधान को नष्ट करना चाहती है। शाम में, बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए विश्वविद्यालय पहुंची लेकिन छात्रों को संबोधित किए बिना ही वहां से चली गईं। छात्रों एवं संकाय ने विश्वविद्यालय में मार्च निकाला था जिसमें एबीवीपी, कुलपति और केंद्र के खिलाफ नारे लगाए।

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कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई को बताया शर्मनाक
विपक्ष ने भी प्राथमिकियां दर्ज कराने पर सवाल उठाए और पुलिस पर निशाना साधा। कांग्रेस (Congress) ने कहा, "जेएनयू में हिंसक हमलों को 40 घंटे बीत चुके हैं और दिल्ली पुलिस स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एक भी अपराधी को पकड़ने में विफल रही।" पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से कहा, "अमित शाह (Amit Shah) के अंतर्गत क्या पुलिस इतनी अक्षम है? उलटे उन्होंने हमले की पीड़िता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। शर्मनाक।" दिल्ली पुलिस ने पांच जनवरी को कुछ ही समय के अंतराल में दो प्राथमिकियां दर्ज की थीं लेकिन ये प्राथमिकियां पहले की घटनाओं को लेकर की गई शिकायतों पर आधारित थीं।

जेएनयू हिंसा मामले में JNUSU अध्यक्ष आइशी घोष समेत 19 पर FIR दर्ज

JNUSU अध्यक्ष के खिलाफ FIR दर्ज
जेएनयू प्रशासन ने इससे दो दिन पहले कथित तोड़फोड़ के सिलसिले में छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत अन्य पदाधिकारियों के नाम शिकायत की थी जिस पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कीं। संयोग से यही वह वक्त था जब पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय में बुलाया गया था और घोष समेत घायल छात्रों को अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस के रोजनामचे के अनुसार विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग ने तीन और चार जनवरी को शिकायत दी थी। ये शिकायतें एक और चार जनवरी को कथित तौर पर तोड़फोड़ की घटनाओं से संबंधित थीं। इस पर रात 8.44 और 8.49 बजे प्राथमिकियां दर्ज की गईं। प्राथमिकी में आरोपियों के कॉलम में घोष अथवा छात्र संघ के किसी पदाधिकारी का नाम नहीं है लेकिन शिकायत में इनके नाम थे।

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JNUSU का प्रशासन पर आरोप
जेएनयूएसयू (JNUSU) के उपाध्यक्ष साकेत मून ने आरोप लगाया कि प्रशासन कुछ छात्रों को चुन-चुनकर निशाना बना रहा है। मून ने सर्वर कक्ष में तोड़फोड़ की घटना में संलिप्तता से इनकार किया। घोष ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रस्तावित शुल्क वृद्धि के खिलाफ उनकी "लड़ाई" जारी रहेगी भले ही प्रदर्शन के हर दिन के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि यह सोच विचार कर दर्ज कराई गईं हैं।

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