Monday, Mar 01, 2021
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किसान आंदोलन के कारण गिरे सब्जियों के दाम, 4 रुपये किलो हुई गोभी

  • Updated on 12/5/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों (New Farm laws) का विरोध कर रहे किसानों का प्रदर्शन लगातार 10वें दिन भी जारी है। किसानों के दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) पर जमा होने के कारण पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आने वाली सब्जियों की स्पलाई (Vegetable Supply) में भारी दिक्कतें आ रही हैं। सब्जियों के ट्रक राजधानी नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिसके कारण सब्जियों के दामों में गिरावट हुई है। 

मुरादाबाद में किसानों का कहना है कि किसान आंदोलन के कारण परिवहन पर अधिक स्टॉक होने के कारण सब्जियों की कीमतों में मंदी है। एक स्थानीय विक्रेता का कहना है कि फूलगोभी की कीमतें लगभग 10 रुपये / किलोग्राम से घटकर लगभग 4 रुपये हो गई हैं। हम अपनी उपज को दिल्ली में आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं।

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आज 2 बजे पांचवे दौर की बैठक
बता दें कि आज दोपहर दो बजे किसानों की केंद्र सरकार के साथ पांचवे दौर की बैठक होनी है। वहीं इससे पहले किसानों ने ऐलान कर दिया है कि ये बैठक अंतिम होगी। यानी अगर कोई भी हल नहीं निकला तो किसानों का आंदोलन उग्र हो सकता है। इसके साथ ही किसानों 8 दिसंबर को भारत बंद का भी ऐलान किया है। 

राज्य के खुफिया विभाग ने किसान आंदोलन के उग्र होने का अंदेशा जताया है। पश्चिमी यूपी के जिला गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद (Ghaziabad), मथुरा, समेत कुछ जिलों से आंदोलन में हिस्सा लेने लोग दिल्ली की तरफ जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि किसानों ने दिल्ली-यूपी मार्ग को कई जगह जाम कर दिया है।

डीजीपी मुख्यालय ने कही ये बात
डीजीपी मुख्यालय से एनसीआर परिक्षेत्र व पश्चिम यूपी के कई अन्य जिलों में पीएसी तैनात कर दी गई है। जोन व रेंज स्तर के पुलिस अफसरों के साथ ही जिलों के पुलिस कप्तानों को इस दिशा में सतर्क रहने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर स्थिति तो सामान्य है लेकिन सतर्कता पूरी बरती जा रही है। आंदोलन के चलते यूपी से दिल्ली जाने वाली रास्त प्रभावति हैं।

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सरकार आज कर सकती है बड़ी घोषणा
सूत्रों ने अनुसार सरकार ने गतिरोध खत्म करने के लिए उन प्रावधानों का संभावित हल तैयार कर लिया है जिन पर किसानों को ऐतराज है। किसानों ने भावी कदम तय करने के लिए दिन के समय बैठक की। बैठक के बाद किसान नेताओं में एक गुरनाम सिंह चडोनी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि केंद्र सरकार शनिवार की वार्ता के दौरान उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है, तो वे नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करेंगे।

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