Thursday, Jan 27, 2022
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रक्षा संस्थानों में स्मार्ट फोन की एंट्री बैन, कार्मिकों को जारी हुई सख्त एडवाइजरी

  • Updated on 11/5/2018

देहरादून/ब्यूरो। रक्षा मंत्रालय के संस्थानों के अधिकारी व कर्मचारी अब संस्थान परिसर में स्मार्ट मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। कहा जा रहा है कि संस्थानों से गोपनीय जानकारियां लीक न हों इसके लिए यह कदम उठाया गया है। 

देहरादून में भी रक्षा मंत्रालय के चार संस्थान डील, आईआरडीई, ओएफडी व ओएलएफ स्थित हैं। रक्षा संस्थानों में स्मार्ट फोन की एंट्री बंद- कार्मिकों को जारी हुई सख्त एडवाइजरी, गोपनीयता बनाए रखने को उठाया गया कदम है। रक्षा मंत्रालय के संस्थानों के अधिकारी व कर्मचारी अब संस्थान परिसर में स्मार्ट मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि संस्थानों से गोपनीय जानकारियां लीक न हों इसके लिए यह कदम उठाया गया है। देहरादून में भी रक्षा मंत्रालय के चार महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। एडवाइजरी 4 नवंबर से लागू कर दी गई है।

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रक्षा मंत्रालय की ओर से अपने अधीन आने वाले महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए विजिलेंस एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में निर्देश दिए हैं कि संस्थानों में सिर्फ ऐसे मोबाइल फोन उपयोग में लाएं जिनमें सिर्फ और सिर्फ कॉल सुनने व करने की सुविधा उपलब्ध हो। यानि ऐसे फोन संस्थान परिसर में प्रतिबंधित रहेंगे जिनमें कैमरा, स्टोरेज, ब्लूटुथ, इंटरनेट और ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग सुविधा उपलब्ध हो। 

निर्देश में कहा गया है कि नोकिया 105 व सैमसंग गुरु एफएम प्लस-एसएम-बी110ई या इस स्तर के ही मोबाइल फोन ही संस्थान परिसर में उपयोग में लाये जा सकेंगे। कार्यालय के काम के लिए यदि कोई स्मार्ट फोन रखना चाहता है तो उसके लिए उच्च अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

इंजीनियर के पकड़े जाने के बाद हुई सख्ती
सीनियर इंजीनियर के पकड़े जाने पर बनाई सख्त एडवाइजरी नौ अक्तूबर को नगापुर स्थित डीआरडीओ के संस्थान ब्रह्मोस मिसाइल का एक सीनियर इंजीनियर निशांत अग्रवाल विदेशी एजेंसियों को संस्थान की गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था। जांच में सामने आया था कि हनीट्रैप में फंसा ये इंजीनियर पाकिस्तान बेस्ड दो महिलाओं के साथ फेसबुक के जरिए लगातार संपर्क में था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय अपने संस्थानों की गोपनीयता को लेकर सख्ती बरत रहा है।

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