Sunday, May 22, 2022
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स्मृति ने जताई इच्छा, मरणोपरांत संभव हुआ तो करेंगी अंगदान

  • Updated on 11/23/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  केंद्रीय महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि देहदान करने का संकल्प कागज पर लेने के बाद कई बार ऐसा समय भी आता है, जब मन में अपने संकल्प पर संशय होने लगता है। लेकिन धन्य है वे परिजन और वे लोग जिन्होंने इस संकल्प को अडिग रहते हुए पूरा किया। उन्होंने इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर संभव हुआ तो वे भी

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मरणोपरांत अपने अंग दान करना चाहेंगी। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जिसने वैक्सीन का दूसरा डोज न लगवाया हो मास्क पहनें, और हाथ धोकर आएं। अन्यथा कुछ दिन में ही देहदान हो जाएगा।।
दधीचि देहदान समिति और मांगेराम गर्ग न्यास के संयुक्त कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय मांगेराम गर्ग की जयंती अवसर पर मंत्री ने यह उद्गार व्यक्त किये। भजन गायक अजय भाई जी ने ऋषि दधीचि की कथा और राम भजन भी प्रस्तुत किया।

देहदान करने वाले परिजनों के प्रति हुई नतमस्तक 

मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि वे करीब चौदह वर्ष पूर्व दधीचि देहदान समिति के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं और आज पुन: इस कार्यक्रम में आने से लगा कि जैसे वे वनवास पर थी, आज लौटी हैं। उन्होंने कहा कि इस मंच से उन परिवार के लोगों को प्रणाम करती हूं जिन्होंने सभी भावनाओं संघर्ष से जूझकर देहदान कराया। क्योंकि केवल कागज पर कलम चलाकर के देहदान संकल्प की बात होना अलग है और उसे पूरा करना अलग। क्योंकि कई बार संकल्प के बाद भी संशय आता है। उन्होंने एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि उस बच्चे के परिवार की हालत, मां पर क्या बीती होगी। उसके पराक्रम को वास्तव में सलाम है, जिसने बच्चे को कोख में 9 माह तक पाला और 7 दिन जीवित रहने के बाद बच्चे के मृत होने पर उसके अंग दान करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि दधीचि कथा केवल ऋषि की कथा नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपनी आजादी के 75 वर्ष के मौके पर बात करते हैं तो तो हम कहते हैं की हम उस राष्ट्र से हैं जिसे अहिंसा और बापू के बताए रास्ते पर चलकर आजादी मिली। लेकिन लेकिन दधीचि देहदान समिति केवल देहदान करने के काम नहीं करती, बल्कि ये भी याद दिलाती है कि समाज को भी कुछ देकर जाएं।

मरणोपरांत भी दिल धड़कता हो तो दिल दान कर दूंगी 

स्मृति ने मंच से कहा कि यदि संभव हुआ  और मरणोपरांत भी दिल धड़कता हो तो दिल दान कर दूंगी। आलोक कुमार ने कहा कि दधीचि जयंती जब थी उस समय कोरोना पीक पर था, ऐसे समय में  लोगों को बुलाना संभव नहीं था। इसीलिए नव दधीचि(मांगेराम गर्ग) की जयंती पर ये कथा हो, ऐसा सोचा। उन्होंने कहा कि कोशिश है कि अगले वर्ष तक समिति यह प्रयास पूरा करे कि दिल्ली में किसी को जरूरत हो तो नेत्र, दिल, फेफड़े, हड्डी जैसे अंग के लिए उसे प्रतीक्षा न करनी पड़े। उन्होंने स्वर्गीय मांगेराम गर्ग की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने शरीर को दान करने का संकल्प ही नहीं किया,बल्कि  राजनीति में भी वे गंदगी साफ  करते रहे। वो चालाक नहीं थे।

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आलोक कुमार ने दिल्ली सरकार पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि मांगेराम में  केजरीवाल का गुण नही था। उनको अंदर बाहर एक समान माना जाता था। यही कारण रहा कि जब भाजपा को धन एकत्रित करने की आवश्यकता हुई तो उन्होंने कहा कि धन एकत्रित करने का काम वे भली प्रकार से कर सकते हैं, क्योंकि उनका नाम ही मांगेराम है।
उन्होंने देहदान करने वाले लोगों और उनके परिजनों के लिए कहा कि ये उन लोगों को टोला है, जिनकी मृत्यु उनके लिए उत्सव बन जाती है।

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आलोक कुमार ने समिति की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व सर संघचालक  नानाजी देशमुख ने संस्था की स्थापना के बाद 25 साल पहले अपने देहदान का संकल्प पत्र भरा था और उस संकल्प को पूरा करने वाले पहले सख्श थे। उन्होंने कहा कि सात दिन का सबसे कम उम्र का अंगदान करने वाले बच्चे से लेकर सबसे अधिक उम्र 76 वर्ष के वीरभान तक देहदान करने वालों में शामिल रहे हैं। कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, प्रदेश भाजपा संघ समन्वय दयानंद, स्वर्गीय मांगेराम के पुत्र एवं भाजपा प्रवक्ता सतीश गर्ग, भाजपा नेता प्रवीण सिंह, प्रदेश महामंत्री हर्ष मल्होत्रा, मीडिया प्रमुख नवीन कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय आदि शामिल रहे। 

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