Thursday, Aug 18, 2022
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सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकार संगठनों ने की मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा

  • Updated on 6/28/2022


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया तथा मुंबई प्रेस क्लब समेत कुछ पत्रकार संगठनों ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए मंगलवार को इसे ‘अत्यंत निराशाजनक’ बताया और जुबैर को तत्काल रिहा किये जाने की मांग की। मीडिया संस्थाओं ने इस बात की ओर इशारा किया कि जुबैर के खिलाफ कार्रवाई उस दिन की गयी है जब भारत ने जी7 देशों के सम्मेलन में भाग लिया और ‘ऑनलाइन तथा ऑफलाइन’ बोलने की आजादी को संरक्षण की वकालत की। गिल्ड ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘स्पष्ट है कि ऑल्ट न्यूज की सतर्कता उन लोगों को रास नहीं आई जो दुष्प्रचार को समाज के ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल करते हैं।’’ 

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दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने जुबैर को धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने तथा धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए जानबूझकर कृत्य करने के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया था। गिल्ड ने कहा, ‘‘जुबैर को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 तथा 295 के तहत गिरफ्तार किया गया है। यह अत्यंत निराशाजनक है क्योंकि जुबैर और उसकी वेबसाइट ऑल्ट न्यूज ने पिछले कुछ सालों में बड़े तथ्यात्मक तरीके से फर्जी खबरों का पता लगाने तथा दुष्प्रचार अभियानों को धता बताने के लिए उत्कृष्ट काम किया है।’’ संस्था ने दिल्ली पुलिस से जुबैर को तत्काल रिहा करने की मांग की। गिल्ड ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जर्मनी में जी7 सम्मेलन में किये गये वादों को पूरा किया जाए ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन सामग्री की रक्षा करके एक लचीला लोकतंत्र बनाया जा सके।’’ 

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कहा, ‘‘मोहम्मद जुबैर को हड़बड़ी में गिरफ्तार करने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा वैश्विक मंच पर जतायी गई देश की प्रतिबद्धता का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया गया।’’ मुंबई प्रेस क्लब ने एक बयान में कहा, ‘‘जुबैर को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं।’’ मुंबई प्रेस क्लब ने बयान में कहा कि ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने आरोप लगाया कि जुबैर को उस मामले में गिरफ्तार किया गया जिसके लिए पुलिस ने कोई नोटिस नहीं दिया था। उसने कहा कि कानून के तहत नोटिस देना अनिवार्य है। इससे पहले डिजिटल मीडिया संस्थानों के एक निकाय ने जुबैर की गिरफ्तारी की ङ्क्षनदा की थी और दिल्ली पुलिस से जुबैर के खिलाफ मामला तत्काल वापस लेने को कहा। डिजिपब ने बयान जारी कर कहा कि लोकतंत्र में सभी लोगों को अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी का अधिकार है, ऐसे में इस तरह के सख्त कानूनों को पत्रकारों के खिलाफ औजार के तौर पर इस्तेमाल करना अन्यायोचित है।  

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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी की निंदा 
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कहा कि इससे सरकार का ‘पाखंड’ दिखाई देता है कि गिरफ्तारी उस दिन हुई जब भारत ने जी7 के सम्मेलन में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता जताई। दिल्ली पुलिस ने 2018 में एक आपत्तिजनक ट्वीट करके कथित रूप से धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में जुबैर को सोमवार को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही गुजरात के अधिकारियों ने 2002 के गुजरात दंगों के मामले में ‘बेगुनाह लोगों को फंसाने के लिए आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और अदालत में झूठे सबूत रखने’ के आरोपों में तीस्ता सीतलवाड़ को गिरफ्तार किया था। 

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ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमन्स एसोसिएशन की सदस्य कविता कृष्णन ने गिरफ्तारियों की ङ्क्षनदा करते हुए आरोप लगाया कि इससे प्रधानमंत्री का ‘‘पूरी तरह पाखंड दिखाई देता है कि एक तरफ भारत के संविधान का उपयोग दिखावे के लिए करना, वहीं उनकी पार्टी को जवाबदेह ठहराने वाले कार्यकर्ताओं तथा पत्रकारों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करना।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं विश्व में लोकतंत्रों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अधिक अपेक्षा रखती हूं। जब मोदी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाते हैं तो उनसे भारत में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के साथ बर्ताव के बारे में पूछा जाना चाहिए।’’ 

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अनहद की संस्थापक शबनम हाशमी ने आरोप लगाया कि यह वक्त आपातकाल से भी बुरा है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंच पर बोलने की आजादी की बात कर रहे हैं और उन्हें इस पर शर्म आनी चाहिए। यह पूरी तरह पाखंड है।’’ एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड के अध्यक्ष आकार पटेल ने कहा कि भारतीय प्राधिकार जुबैर पर इसलिए निशाना साध रहे हैं क्योंकि वह फर्जी खबरों और दुष्प्रचार में वृद्धि के खिलाफ काम कर रहे हैं। 


 

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