Wednesday, Oct 27, 2021
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सोशल मीडिया: इंटरनेट की दुनिया में जियो मेरे लाल !

  • Updated on 9/15/2017

NavodayatimesNavodayatimesNavodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। हमारे देश में इंटरनेट की दुनिया जितनी एक साल के भीतर बदली है उतनी कभी नहीं बदली। दूरसंचार के क्षेत्र में रिलायंस का जियो आने के बाद तो जैसे कमाल ही हो गया है। जहां पहले एक-एक एमबी डाटा लोग सोच समझकर खर्च किया करते थे वहीं अब एक दिन में एक जीबी डाटा भी लोगों को पूरा नहीं पड़ रहा है। जैसे ही मन किया तुरंत यू्ट्यूब आन कर लिया और शुरू हो जाता है वीडियो देखने का सिलसिला।

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आनलाइन कारोबार को भी इससे पर लग गए हैं। अब सभी कंपनियां ऐसी आफर दे रही हैं कि आपको केवल डाटा के लिए पे करना होता है बाकी कालिंग तो एकदम फ्री ही चल रही है। बिल्स तो 100-150 रुपये प्रति माह तक गिर गए हैं। शायद यही वजह है कि जियो ने 13 करोड़ से ज्यादा ग्राहक बना डाले हैं और बाजार का 10 प्रतिशत शेयर अब उसके पास है। आलम यह है कि दूसरी टेलीकॉम कंपनियां बार-बार ट्राई का दरवाजा खटखटा रही हैं या फिर सरकार से हस्तक्षेप से करने के लिए कह रही हैं।

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सबका मानना है कि जियो ने जिस तरह की परंपरा बाजार में डाली है उससे सभी कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है। बहरहाल इस लड़ाई में जीत उपभोक्ता की हो रही है। डालते हैं जियो के बाजार में आने के बाद इंटरनेट की दुनिया में आए बदलावों पर एक नजर:

इस तरह हुई शुरूआत

रिलायंस ने 2010 में इस मैदान में प्रवेश किया। उसने इंफोटेल ब्राडबैंड को खरीदा जिसके पास 4जी एयरवेज थी 2300एमएच बैंड पर और वो भी देश के सभी 22 सर्किल्स में। जियो ने अपनी सेवाएं 5 सितम्बर 2016 से शुरू की। 

व्यवसायिक गठबंधन

जियो के आने के बाद से भारतीय इंटरनेट बाजार में इतना बदलाव आया कि शायद अब यह फिर से पुरानी शक्ल में नहीं लौट पाएगा। वोडाफोन और आइडिया के बीच मर्जर। आरकॉम, एयरसेल और एमटीएस का एक हो जाना। भारती एयरटेल का टेलीनॉर को खरीद लेना आदि ऐसे बदलाव हैं जिनके बारे में किसी ने सोचा नहीं था। 

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दस बड़े बदलाव

भारत में डाटा खपत 

  20 करोड़ जीबी प्रति माह
 150 करोड़ जीबी प्रति माह, दुनिया में सबसे ज्यादा

डाटा टैरिफ 

 250 रुपये प्रति जीबी
 50 रुपये प्रति जीबी से भी कम

औसतन राजस्व प्रति उपभोक्ता
 141 रुपये (दिसम्बर 2016 तक)
 131 रुपये (मार्च 2017 तक) 
 
औसतन राजस्व/उपभोक्ता (वॉयस)
 180 रुपये (अगस्त 2016 तक) 
 68 रुपये (मार्च 2017 तक)

औसतन मासिक मोबाइल बिल (पोस्टपेड)
 349 रुपये (2016 के अंत में) 
 240-280 रुपये (वर्तमान में)

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टैरिफ प्लान्स
 वॉयस/डाटा के चार्ज अलग-अलग होते थे, रोमिंग की दरें महंगी थीं। 
 प्लांस में भारी बदलाव, वॉयस कालिंग बहुत से प्लान्स में फ्री, रोमिंग रेट में भारी कमी (एक तरह से फ्री)। 

ब्राडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या 
 15.4 करोड़ (31 अगस्त 2016 तक)
 28.2 करोड़ (जून 2017 तक)

4जी स्मार्टफोन्स की संख्या
 4.7 करोड़
 13.1 करोड़ 

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स्मार्टफोन्स में 4जी डिवाइसों का इस्तेमाल

 66 प्रतिशत (2016 के पहले क्वार्टर में)
 95 प्रतिशत (2017 के पहले क्वार्टर में)

सिम एक्टिवेशन टाइम (डिजिटल तरीके से)
 1 से 3 तीन दिन
 मात्र 15 मिनट में  

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