Thursday, Jan 27, 2022
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अध्यक्ष बनी रहेंगी सोनिया गांधी, दिल टूटा लेकिन....

  • Updated on 8/24/2020

नई दिल्ली/ब्यूरो। सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ही फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहेंगी। वीडियो लिंक के जरिए सोमवार को पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की करीब 7 घंटे तक चली बैठक का सारा लब्बोलुआब यही रहा। सोनिया गांधी ने भी चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के प्रति यही भाव जताया कि इससे उनका दिल टूटा लेकिन कोई गिला-शिकवा नहीं है।

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पूरे दिन की गहमा-गहमी के बाद वही हुआ, जिसकी संभावना पहले से थी। सारी कहानी जैसे स्क्रिप्टेड सी लगती है। 23 नेताओं की सोनिया गांधी के नाम दो हफ्ते पहले एक चिट्ठी लिखी गई। सीडब्ल्यूसी की बैठक के 24 घंटे पहले उसे लीक किया गया। उस पर नेताओं के अलग-अलग बयान आए और एक विवाद बनाया गया। सीडब्ल्यूसी में अंततः एकमत से सोनिया गांधी-राहुल गांधी के नेतृत्व में ही पूरी पार्टी का भरोसा जताया गया और अध्यक्ष पद पर बने रहने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। इस तरह सोनिया गांधी ही फिलवक्त नए अध्यक्ष के चयन तक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। इससे राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की पैरोकारी करने वाले नेताओं को थोड़ी हताशा हो सकती है। लेकिन दर्शाया यही गया कि पार्टी को टूट से बचाने के लिए संभवतः ऐसा कदम उठाया गया।

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बैठक शुरू होने के साथ ही खबर आई कि सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष का पद छोड़ने की पेशकश कर सीडब्ल्यूसी से नया अध्यक्ष चुनने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ए.के. एंटनी ने इसमें दखल देते हुए एआईसीसी के पूरे सत्र तक अध्यक्ष बने रहने की अपील की। मामला तब गरमाया, जब पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को निशाने पर लेते हुए कथित तौर पर उनके भाजपा से मिले होने का आरोप लगा दिया। सोनिया का बचाव करते हुए उन्होंने चिट्ठी की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह ऐसे वक्त में लिखी गई, जब सोनिया गांधी अस्वस्थ हैं और पार्टी मध्य प्रदेश-राजस्थान के संकट से जूझ रही है। राहुल का समर्थन सोनिया गांधी ने यह कहते हुए किया कि वे चिट्ठी को लेकर आहत हैं, लेकिन सभी मेरे सहयोगी हैं।

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सूत्रों के मुताबिक चिट्ठी को लेकर बैठक में काफी गरमा-गरम बहस हुई। राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता गुलाम नबी आजाद ने राहुल के कथित वक्तव्य पर आपत्ति जताई। सूत्रों का कहना है कि एक वक्त सीडब्ल्यूसी दो खेमों में बंटी नजर आई, लेकिन अहमद पटेल फिर संकट मोचक बन कर सामने आए। उन्होंने चिट्ठी के औचित्य को लेकर यह तो कहा कि इसकी जरूरत क्या थी, किसी को कुछ कहना था तो पार्टी फोरम पर आकर कह सकते थे। लेकिन माहौल को सामान्य बनाते हुए उन्होंने राहुल गांधी से दोबारा पार्टी अध्यक्ष पद स्वीकार करने की अपील कर दी।

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मालूम हो कि दो सप्ताह पहले राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद, उपनेता आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी समेत 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से एक चिट्ठी कांग्रेस अध्यक्ष के नाम पर लिखी गई, जिसमें सामूहिक नेतृत्व और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग के साथ संगठन में ऊपर से नीचे तक बदलाव की जरूरत बताई गई है। पत्र में युवाओं का पूरा समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलने और कांग्रेस का नेतृत्व विफल रहने की भी बात कही गई है। यही चिट्ठी सीडब्ल्यूसी की बैठक में पूरे समय चर्चा में रही।

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बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में कांग्रेस महासचिव संगठन के.सी. वेणुगोपाल और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्षा को लिखे हुए पत्र का संज्ञान लेते हुए गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पूरी सीडब्ल्यूसी ने एकमत से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया और कहा कि पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति न तो किसी को दी जा सकती है और न ही किसी को दी जाएगी।

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उन्होंने बताया कि सीडब्लूसी ने इसका भी संज्ञान लिया कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर विचार विमर्श मीडिया के माध्यम से या सार्वजनिक पटल पर नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं को राय दी की पार्टी से संबंधित मुद्दे पार्टी के मंच पर ही रखे जाएं, ताकि उपयुक्त अनुशासन भी रहे और संगठन की गरिमा भी। उन्होंने बताया कि सीडब्लूसी ने कांग्रेस अध्यक्षा को जरूरी संगठनात्मक बदलाव के कदम उठाने के लिए अधिकृत करने के साथ ही उनसे कोरोना काल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अगले अधिवेशन के बुलाए जाने तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा का पद संभाले रहने का अनुरोध किया है।

 

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