Tuesday, Aug 21, 2018

डिनर के बहाने मिशन 2019 का समीकरण बनाएंगी सोनिया, लेकिन ये सवाल भी हैं जरुरी?

  • Updated on 3/13/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोनिया गांधी की डिनर पार्टी में 17 पार्टियों को आमंत्रण देकर सरकार के खिलाफ लंबे समय से विपक्ष को मजबूती देने और एक साथ आने की बातों को बल मिल गया है। सोनिया की डिनर पार्टी में सभी दलों को सोनिया ने खुद फोन करके बुलाया है लेकिन कुछ पार्टियों ने अभी भी दूरी बना रखी है। सत्तारुढ़ भाजपा सरकार के जीत के रथ को रोकने के लिए विपक्ष कमर कस चुका है और डिनर के जरिए डिप्लोमेसी की तैयारी है। आएये देखते हैं इससे क्या सवाल और समीकरण बनते हैं:

डिनर में इनको मिला न्यौता और इनको नहीं

इस डिनर समारोह में कांग्रेस के अलावा  सपा, बीएसपी, टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, डीएमके, जेएमएम, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, आरजेडी, जेडीएस, केरल कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, आरएसपी, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस, एआईयूडीएफ, आरएलडी शामिल होंगे। वहीं इस पार्टी में ममता बनर्जी और आंध्र प्रदेश की सत्तारुढ़ तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), बीजू जनता दल (बीजद) और टीआरएस के नेताओं को नहीं बुलाया गया है।

विपक्ष का कमान कांग्रेस के हाथ?

सोनिया गांधी इस तरह से विपक्ष को साथ लेकर एक मैसेज देना चाहती है कि मोदी और भाजपा के खिलाफ खड़ी पार्टियों का नेतृत्व तो कांग्रेस के हाथ ही रहेगा। साथ ही सीधे तौर पर भाजपा के खिलाफ खुल तौर पर राहुल गांधी का खड़ा करने की कवायद साफ दिखती है।

मोदी के खिलाफ सोनिया का डिनर, राहुल का क्यों नहीं?

वहीं इस पर भी सवाल उठ रहें हैं कि गुजरात चुनावों से साफ हो चुका है कि राहुल गांधी कांग्रेस के कर्ताधर्ता हैं। ऐसे में सोनिया को विपक्ष एकजुट करने के लिए ही आगे क्यों लाया गया? क्या उनके 19 साल के अनुभव का सहारा लिया जा रहा है या फिर राहुल गांधी पर लोगों को भरोसा नहीं जो मोदी के खिलाफ उन्हें नेता के तौर पर खड़ा कर सकें। 

क्या राहुल स्वीकार नहीं?

वहीं कुछ पार्टियों का इस भोज में शामिल ना होना बताता है कि ये राहुल गांधी के नेतृत्व या फिर कांग्रेस को विपक्ष के नेतृत्व के तौर पर स्वीकार नहीं करते।

कितने होंगे कामयाब?

वजह कुछ भी हो 17 पार्टियों का आना कहीं ना कहीं 2019 के चुनावों का मांग थी क्योंकि मोदी के जीत के रथ को रोकने के लिए कांग्रेस अकेले काफी नहीं है और मोदी विरोधियों का संख्या बल ज्यादा है। ऐसे में इनका साथ आना जरुरी है। अब देखना है कि सोनिया गांधी की डिनर पार्टी क्या बिखरी और बेजान विपक्ष में जान फूंक पाएगी?

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