Monday, Jan 27, 2020
speaker forgets constitutional decorum, slogans in support of caa on roads

'मोदी भक्ति' में संवैधानिक मर्यादा भूले स्पीकर, सड़कों पर CAA के समर्थन में लगाये नारे

  • Updated on 1/12/2020

देहरादून/ब्यूरो। सीएए (CAA) को लेकर देशभर में समर्थन और विरोध-प्रदर्शन का दौर लगातार जारी है। इस क्रम में एक नया मोड़ तब आया जब विधानसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन ऋषिकेश (Rishikesh) के विधायक प्रेमचंद अग्रवाल के पार्टी की रैली में शामिल होने को लेकर संवैधानिक परम्पराओं पर सवाल खड़ा हो गया है।

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विधानसभा अध्यक्ष ने की नारेबाजी
अग्रवाल ने न सिर्फ रैली में शिरकत की बल्कि इसकी कमान भी खुद अपने हाथों में ले ली और वे सड़कों में आज नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आये। ऋषिकेश के श्यामपुर क्षेत्र में रविवार को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भाजपा की मंडल इकाई ने रैली का आयोजन किया, जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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अध्यक्ष का रैली में शामिल होना संवैधानिक परम्परा का उल्लंघन
रैली ठाकुरपुर पंचायत घर से शुरू होकर विभिन्न स्थानों से होते हुए वहीं आकर समाप्त हुई। शुरूआत से समाप्त होने तक विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल रैली की अगुवाई करते हुए सीएए के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आये। रैली में शामिल लोग हाथ में भाजपा का झण्डा और बैनर पकड़े हुए थे। विधानसभा अध्यक्ष होते हुए विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का राजनैतिक रैली में शामिल होना संवैधानिक परम्परा का उल्लंघन माना जा रहा है।

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संविधान के अध्याय 5 में सदन के अध्यक्ष की भूमिका   

 1-अध्यक्ष की कोई राजनीति नहीं होती। वह तटस्थ होता है। अध्यक्ष के पद पर निर्वाचित होने के बाद वह अपने दल की गतिविधियों से अलग हो जाता है।

2- ज्योंही कोई व्यक्ति अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठता है त्योंही उससे यह आशा की जाती है कि वह दलों से अपना सम्बंध तोड़ ले। जब वह अध्यक्ष बना जाता है तो उसकी अपनी कोई राजनैतिक राय नहीं रहती है और उसको अपने राजनैतिक मित्रों एवं विरोधियों के साथ एक समान व्यवहार रखना चाहिए।

‘विधानसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक होता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति को संविधान, संवैधानिक व्यवस्था और परम्परा का पालन करना होता है। हालांकि हर आदमी का अपना विवेक ओर इच्छाशक्ति होती है। प्रयास यह होना चाहिए कि संवैधानिक परम्पराए न टूटें’- गोविन्द सिंह कुंजवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक कांग्रेस।

‘मैं भी विधानसभा अध्यक्ष रहा हूं। मैंने अपने कार्यकाल के दौरान न तो पार्टी की किसी मीटिंग और न ही कार्यक्रम में भाग लिया। संवैधानिक परमपराओं की बाउण्डेशन तो नहीं है लेकिन इनका निर्वहन जरूर किया जाना चाहिए’ -हरवंश कपूर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक भाजपा।

‘सीएए एक कानून है। कुछ लोग इसका विरोध अराजकता के साथ कर रहे हैं। इस कानून की रक्षा के लिये ही में आम लोगों के साथ सड़क पर उतरा हूं। इसमें संवैधानिक मर्यादा के उल्लंघन जैसी कोई बात नहीं है’-प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष।

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