special invitation sent to india despite not being a member of g-7 group

G-7 ग्रुप का सदस्य नहीं होने के बाद भी भारत को भेजा गया स्पेशल इनविटेशन, जानिए क्यों ?

  • Updated on 8/26/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फ्रांस के बिआरिट्ज में इस वक्त G-7 शिखर सम्मेलन चल रहा है और इस सम्मेलन में विश्व के सात विकसित देश हिस्सा लेते हैं। ये G-7 सात एलीट देशों का ग्रुप है। ये देश दुनिया की अर्थव्यवस्था की देखभाल करने का जिम्मा उठाते हैं। पूरी दुनिया की 40% GDP इन्हीं देशों पर निर्भर है। जहां जीडीपी में इतनी बड़ी भागेदारी है वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया की मात्र 10% आबादी ही इन देशों पर निर्भर करती है। अफसोस की बात ये है कि भारत इस क्लब का सदस्य नहीं है।

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 आज हम आपको बताएंगे कि सदस्य देश न होने के बावजूद क्यूं भारत को इस सम्मेंलन में भाग लेने के लिए बुलाया गया। भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था में उभरता हुआ अग्रणी देश है और इसके साथ ही विश्व में भारत की बढ़ती ताकत और पैठ के कारण इस सम्मेलन में VIP गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंच चुकें हैं। 

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इमैनुएल मैक्रो हैं अध्यक्ष
G-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका सदस्य हैं लेकिन स्थापना के बाद 1977 में इस ग्रुप में यूरोपीय यूनियन को भी शामिल किया गया। बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपित इमैनुएल मैक्रो G-7 ग्रुप के अध्यक्ष है और उन्हें यह अधिकार प्राप्त है कि वे किसी भी गैर सदस्य देश को इस सम्मेलन के लिए बुला सकते हैं। भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती आपसी साझेदारी और विश्व में भारत की उपयोगिता को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने भारत को इसमें भाग लेने के लिए बुलाया है।

विदेश मंत्रालय ने दी सूचना
विदेश मंत्रालय ने बताया जानकारी देते हुए कहा कि G-7 का सदस्य देश न होने के बाद भी फ्रांस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसमें भाग लेने के लिए स्पेशल इनविटेशन भेजा है इससे यह जाहिर होता है कि पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के बीच गहरी दोस्ती है और दोनों देशों के संबंध भी सामरिक दृष्टि से बहुत मजबूत हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि G-7 सम्मेलन में भारत की भागेदारी भारत की बढ़ रही आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।

फ्रांस ने तय किया एजेंडा
आप को बता दें जी-7 ग्रुप का कोई सचिवालय नहीं है और न ही इसका कानूनी तौर पर इसका कोई स्वरूप है। फ्रांस इस बार सम्मेलन का अध्यक्ष देश है और वह ही इसके कार्यों और भविष्य के एजेंडों को तैयार करेगा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने इस बार इसकी थीम आर्थिक और सामाजिक असामनता और लैंगिक असमानता को बनाया है

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