Monday, Jan 24, 2022
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speculator to cid and said - parambir singh asked for 10 crores to save from arrest pragnt

CID के आगे सट्टेबाज का खुलासा, कहा- गिरफ्तारी से बचाने के लिए परमबीर सिंह ने मांगे 10 करोड़

  • Updated on 5/26/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। क्रिकेट सट्टेबाज सोनू जालान ने अपराध जांच विभाग (CID) के समक्ष दर्ज कराए गए बयान में आरोप लगाया है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने उससे कहा था कि अगर वह एक 'बड़े मामले' में गिरफ्तारी से बचना चाहता है तो पूर्व पुलिस निरीक्षक प्रदीप शर्मा को 10 करोड़ रुपए दे।

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सट्टेबाज का बड़ा बयान
सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सिंह और शर्मा दोनों की ही प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी जालान द्वारा आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह, शर्मा और निरीक्षक राजकुमार एवं अन्य के खिलाफ लगाए गए वसूली के आरोपों की जांच कर रही है। अपने बयान में जालान ने सीआईडी अधिकारियों को बताया कि मई 2018 में सट्टेबाजी के एक मामले में ठाणे पुलिस की 'रंगदारी निरोधी प्रकोष्ठ' द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे ठाणे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के पास ले जाया गया था।

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परमबीर ने गिरफ्तारी से बचाने के लिए मांगे 10 करोड़
जालान ने दावा किया कि सिंह ने उससे भारत में सक्रिय क्रिकेट सटोरियों की जानकारी मांगी और उसे परिवार के सदस्यों समेत एक 'बड़े मामले' में गिरफ्तार करने की धमकी दी। बयान में जालान ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उससे 10 करोड़ रुपये प्रदीप शर्मा को देने को कहा गया।

परमबीर सिंह केस में आया नया मोड़, सुनवाई से जज गवई ने खुद को किया अलग

जज ने खुद को केस से किया अलग
आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई ने मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। याचिका में सिंह ने अपने खिलाफ चल रही सभी जांच महाराष्ट्र के बाहर स्थानांतरित करने और किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोधा किया है।

न्यायमूर्ति विनीत शरण और न्यायमूर्ति गवई की अवकाश पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया। मामले की सुनवाई शुरू होने पर न्यायमूर्ति शरण ने कहा, 'भाई (न्यायमूर्ति गवई) को इस मामले पर सुनवाई में कुछ परेशानी है। हम कहना चाहते हैं कि इस मामले को किसी अन्य पीठ के पास भेज दिया जाए।' न्यायमूर्ति गवई ने कहा, 'इस मामले पर मैं सुनवाई नहीं कर सकता।' पीठ ने कहा, 'किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसमें हम शामिल नहीं हों।'

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