Friday, Feb 03, 2023
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बिहार चुनाव में बहुमत से चूके तेजस्वी, अपनी पार्टी को बनाया नंबर 1

  • Updated on 11/11/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के परिणाम में एनडीए (NDA) ने बहुमत हासिल करते हुए 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं विपक्षी महागठबंधन को 110 सीटों पर संतोष करना पड़ा। निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक बिहार में सत्ताधारी राजग में शामिल बीजेपी ने 74 सीटों पर, जदयू ने 43 सीटों पर, विकासशील इंसान पार्टी ने 4 सीटों पर और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन में शामिल राजद 75 सीटों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने 19 सीटों पर, भाकपा माले ने 12 सीटों पर, भाकपा और माकपा ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की है। 

चुनावी नतीजे आने से पहले अनुमान था कि इस बार आरजेडी नेता और मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी इतिहास रच सकते हैं लेकिन वे इससे चूक गए। अगर वे ये चुनाव जीत जाते तो देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री हो सकतें थे।

बिहार चुनाव मतगणना वाले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फोन कर बात की। जानकारी के मुताबिक दोनों के बीच चुनाव नतीजों और रुझानों को लेकर बात हुई। 

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जदयू को लोजपा के कारण हुआ नुकसान
इस बार बिहार में विधानसभा चुनाव के अब तक आए परिणाम और रुझान संकेत दे रहे हैं कि सत्तारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) को चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं इसके लिए लोजपा को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि लोजपा ने कम से कम 30 सीटों पर जेडीयू को नुकसान पहुंचाया है।

लोजपा के साथ भारतीय जनता पार्टी के 22 बागी लोजपा के टिकट पर मैदान में उतरे थे। लोजपा में जदयू के बागी और पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा लोजपा के टिकट से लड़े और हार गये। इन 22 बागियों में से 21 जदयू के खिलाफ उतरे थे। वहीं एक कैंडिडेट बनियापुर से वीआईपी के खिलाफ लड़ा। 

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लोकतांत्रिक गठबंधन
वहीं, इन चुनावों में भले ही एनडीए और महागठबंधन के बीच टक्कर रही लेकिन इन चुनावों में दो और गठबंधन भी थे जिनपर चुनावों में नजर रही। इनमें पप्पू यादव की अगुवाई वाला प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाला ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट शामिल थे। 

इसके अलावा बीएसपी के अंबिका सिंह और आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह में रामगढ़ सीट पर कड़ा मुकाबला रहा। जबकि चैनपुर सीट पर पार्टी ने जीत हासिल की। बीएसपी गोपालगंज में दूसरे नंबर पर रही। इसके अलावा भोजपुर, शाहाबाद की कई सीटों का चुनावी समीकरण भी बीएसपी की वजह से प्रभावित हुआ।

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एआईएमआईएम को मिली कामयाबी
इन चुनावों में ओवैसी बहुत बड़ा फैक्टर बनकर उभरे हैं। मिथिलांचल से लेकर कोसी और सीमांचल के इलाके तक ओवैसी ने गहरा प्रभाव छोड़ा। ओवैसी की पार्टी ने आरजेडी के माय यानी मुस्लिम और यादव समीकरण बिगाड़ दिए। एआईएमआईएम (AIMIM) के उम्मीदवारों ने मुस्लिम वोट तो लिए ही साथ ही अमौर, वायसी, जोकीहाट सीट भी जीत ली।

राजद के कद्दावर नेताओं को मिली हार
दूसरी ओर बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के विश्वासपात्र भोला यादव मंगलवार को दरभंगा जिले के केवटी और हायाघाट सीटों पर अपने निकटतम बीजेपी प्रतिद्वंद्वियों मुरारी मोहन झा से हार गए।

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EVM पर सवाल
इस चुनाव में ईवीएम एक अहम मुद्दा रहा है इसके विश्वसनीयता के संबंध में कुछ नेताओं द्वारा सवाल उठाए गए, तो चुनाव आयोग ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि यह मशीन पूरी तरह मजबूत है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती। बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों में महागठबंधन के पिछड़ने के बाद कांग्रेस नेता उदित राज ने मंगलवार को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि जब उपग्रह को धरती से नियंत्रित किया जा सकता है तो फिर ईवीएम हैक क्यों नहीं की जा सकती? 

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