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वैज्ञानिक तरीके से पराली निपटान, लाइव डेमो देखने पूसा परिसर पहुंचे CM केजरीवाल

  • Updated on 9/24/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एआरएआई पूसा (Pusa) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उत्तर भारत में सर्दियों के महीने में वायु प्रदूषण  (Air Pollution) के प्रमुख स्रोत कृषि अवशेषों (पराली) के निस्तारण को लेकर विकसित की नई तकनीक के बारे में बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) के सामने प्रस्तुति दी।

एआरएआई द्वारा विकसित इस नई तकनीक की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ठंड के मौसम में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत धान की पराली और फसल के अन्य अवशेष हैं, और एआरएआई वैज्ञानिक को फसल के अवशेष जलाने की समस्या से निपटने के लिए कम लागत वाली प्रभावी तकनीक विकसित करने के लिए बधाई देता हूं।

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सीएम केजरीवाल ने किया पूसा परिसर का दौरा
उन्होंने कहा कि सरकारों को फसल के अवशेष को जलाने की समस्या का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज यानी गुरुवार को इस तकनीक के लाइव डेमोंसट्रेशन के लिए पूसा परिसर का दौरा किया

यह तकनीक पूसा डीकंपोजर कहीं जाती है जिसमें आसानी से उपलब्ध इनपुट के साथ मिलाया जा सकता है। फसल वाली खेतों में छिड़काव किया जाता है और 8 से 10 दिनों में फसल के डंठल के विघटन को तय करने और जलाने की आवश्यकता को रोकने के लिए खेतों में छिड़काव किया जाता है।

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कैप्सूल की लागत केवल ₹20 प्रति एकड़
कैप्सूल की लागत केवल ₹20 प्रति एकड़ है और प्रभावी रूप से प्रति एकड़ 4 से 5 टन कच्चे भूसे का निस्तारण किया जा सकता है। पंजाब और हरियाणा के कृषि क्षेत्रों में पिछले 4 सालों में एआरएआई द्वारा किए गए शोध के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, जिससे पराली जलाने की जरूरतों को कम करने और साथ ही उर्वरक की खपत कम करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के नजरिए से इसका उपयोग करने से लाभ मिलता है।

इसकी प्रभावित क्षमता और आसानी से इस्तेमाल की जा सकने वाली तकनीक से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री आज यानी 24 सितंबर को एक लाइव स्टेशन के लिए पूसा परिसर गए। 

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