आसमान से गिरी खजूर में अटकी

  • Updated on 11/23/2018

ब्रिटिश प्रधानमंत्री थैरेसा मे के विरुद्ध टोरी पार्टी के अंदर उठा विद्रोह का तूफान तो टल-सा गया है लेकिन उनकी मुसीबतों का अभी अंत नहीं हुआ। उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की कोशिशें सिरे नहीं चढ़ सकीं क्योंकि ऐसे प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के लिए हाऊस ऑफ कॉमन्स के कम से कम 48 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता अनिवार्य होती है लेकिन जिस टोरी नेता ने थैरेसा मे को प्रधानमंत्री पद से हटाने का अभियान शुरू किया था वह 24 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाए। तोप का जो गोला वह थैरेसा मे पर चलाना चाहते थे वह उलटे उन्हीं के ऊपर चल गया है। 

पिछले सप्ताह ही मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर प्रमुख टोरी नेता रीस मोग्ग ने संकट में घिरी थैरेसा मे की स्थिति का फायदा उठा कर स्वयं प्रधानमंत्री बनने के जो सपने देखे थे, वे चकनाचूर हो गए हैं। इस चाल में पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया। हताश हो कर उन्हें यह कहना पड़ गया है कि अब हमें थैरेसा मे को प्रधानमंत्री के तौर पर अगले चुनाव तक सहन करना पड़ेगा। अगले चुनाव 2022 में हैं।  

संकटों का अंत नहीं
लेकिन इससे थैरेसा मे के संकटों का अंत नहीं हो गया। अभी उनकी हालत ‘आसमान से गिरी खजूर में अटकी’ जैसी है। उन्हें अभी एक नहीं, दो-दो बड़े मोर्चों पर लड़ाई लडऩी है- एक तो यूरोपियन यूनियन (ई.यू.) छोडऩे पर ब्रिटेन और ई.यू. के भविष्य के सम्बन्ध क्या होंगे, उसके लिए उन्होंने जो संधि कठिन परिश्रमों के पश्चात तैयार की है, उसे ब्रिटिश संसद से मंजूर करवाना और दूसरे, उस संधि के लिए ई.यू. के बाकी 27 देशों की स्वीकृति प्राप्त करना।

उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए टोरी पार्टी के अंदर सुलगा  तूफान भले ही थम-सा गया है लेकिन नई संधि के विषय पर पार्टी सांसदों में वृहद सहमति है, ऐसी धारणा बिल्कुल गलत है। टोरी सांसदों की एक भारी संख्या इस संधि की कई धाराओं को ब्रिटिश हित के प्रतिकूल समझते हुए उसके विरुद्ध वोट देने के संकेत दे चुकी है। संसद में टोरी पार्टी अल्प संख्या में है। 

थैरेसा मे सत्ता में हैं तो आयरलैंड के डैमोक्रेटिक उल्स्टर पार्टी के 10 सदस्यों के समर्थन से। इस पार्टी को नई संधि की कई धाराएं स्वीकार नहीं। संसद में वोट की स्थिति में इस पार्टी ने भी समर्थन देने के लिए शंकाएं पैदा कर रखी हैं। इसी तरह लेबर नेता जेरेमी कोॢबन ने भी अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि संसद में संधि पर वोट की स्थिति में उनका मत किधर होगा। लिबरल डैमोक्रेट पार्टी खुल कर विरोध में है।

कुल मिला कर स्थिति अभी धुंधली-सी है लेकिन लक्षण ऐसे पैदा हो रहे हैं कि थैरेसा मे संसद की मंजूरी हासिल करने में सफल हो जाएंगी वरना देश एक भीषण संकट में घिर जाएगा।

संधि की मंजूरी का महत्व
संसद से मंजूरी के आधार पर ही थैरेसा मे यूरोपियन यूनियन के बाकी सदस्यों से संधि मंजूर करवाने की कोई बात कर सकने की स्थिति में होंगी। ऐसी मंजूरी हासिल करने का समय अब बिल्कुल खत्म होने को है। रविवार 25 नवम्बर को ई.यू. के ब्रसल्स मुख्यालय में यूरोपियन यूनियन के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हो रही है जिसमें थैरेसा मे की प्रस्तावित संधि पर विचार होगा। 

कई देश इसके विरोध में आवाज उठा चुके हैं। जर्मन चांसलर मर्केल ने मीटिंग में शामिल न होने की घोषणा कर दी है। इसी तरह स्पेन भी पहले अपनी कुछ शर्तें मनवाना चाहता है। रविवार वाली बैठक का परिणाम क्या निकलता है, थैरेसा मे का भविष्य इस पर निर्भर करेगा।                                                                                               ---कृष्ण भाटिया

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.