students of delhi govt school are happy with commendable changes done by govt

केजरीवाल सरकार ने बदली स्कूलों की सूरत, बच्चे बोल रहे हमारी समाज में बढ़ी इज्जत

  • Updated on 7/9/2019

नई दिल्ली/ कामिनी बिष्ट। दिल्ली में सरकारी स्कूलों (Delhi Government School) की बदली सूरत से देश ही नहीं विदेशों में भी इसकी चर्चा है। विपक्ष भले ही केजरीवाल सरकार (Delhi Government) की कितनी ही निंदा क्यों न कर ले लेकिन सरकारी स्कूलों की कायापलट कर केजरीवाल सरकार ने गरीब बच्चों को अवसर के साथ-साथ इज्जत भी दी है। ये आम आदमी पार्टी (AAP) के किसी नेता का बयान नहीं बच्चों के अपने विचार हैं।

देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति से वो हर बच्चा वाकिफ है जो मजबूरी, गरीबी के चलते वहां से पढ़ाई करता है। सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब होती है कि गरीब और मजबूर बच्चे ही उसमें पढ़ाई करने जाते हैं। बच्चों को ये बताने में शर्म महसूस होती है कि वो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। हमारे समाज में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इज्जत की नजरों से नहीं देखा जाता, ये बात उतनी ही सच है जितना केंद्र में बीजेपी का पुन: प्रचंड बहुमत से सत्ता में आना।

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केजरीवाल सरकार ने स्कूलों की बदली सूरत

किसी नेता, किसी बड़े कारोबारी, किसी मंत्री का बच्चा क्यों सरकारी स्कूलों में नहीं जाता?  वजह साफ है- जहां बैठने को कुर्सी तो छोड़ो चटाई तक नहीं होती, पढ़ाने को शिक्षक नहीं होते, शौचालय तक नहीं होता यदि होता है तो उसकी हालत देखने लायक नहीं होती, ऐसे स्कूलों में अमीरों के फूल जैसे बच्चे भला कैसे पढ़ सकते हैं?

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ऐसे सरकारी स्कूलों की सूरत बदली है आम आदमी प्रशासित दिल्ली सरकार ने। जिन स्कूलों में बैठने को कुर्सी तक नहीं होती थी वहां के बच्चे अब कमप्यूटर चलाते हैं, अंग्रेजी बोलते हैं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों का इनफ्रास्ट्रक्चर बड़े निजी स्कूलों के इनफ्रास्ट्रक्चर को टक्कर देने वाला है। बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए ‘मिशन बुनियाद’ जैसी जो योजना दिल्ली सरकार लाई है वो वाकई सराहनीय है।  

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समाज में बढ़ी बच्चों की इज्जत

आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे समाज में सिर उठाकर बोल सकते हैं कि वो एक सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। आज उनको कोई हीन भावना के साथ नहीं देखता है। दिल्ली के स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चे खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि अब उन्हें ये बोलने में शर्म महसूस नहीं होती  कि वो एक सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। समाज में उनकी इज्जत बढ़ी है। इसका पूरा श्रेय दिल्ली सराकर और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की पूरी टीम को जाता है।

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अन्ना आंदोलन को छोड़, लोकपाल के देशव्यापी जन आंदोलन को हाशिए पर लाने के लिए भले ही जनता केजरीवाल और उनके सहयोगियों को दोषी ठहराए, लेकिन दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधार को लेकर उनके मुख से ये जरूर निकलता होगा कि ‘हां केजरीवाल ने काम तो किया है’।

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