Monday, Oct 03, 2022
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BHU परिसर में इफ्तार को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन, प्रशासन नाराज

  • Updated on 4/28/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के महिला महाविद्यालय परिसर में बुधवार शाम इफ्तार के आयोजन को लेकर छात्रों ने हंगामा किया और नयी परम्परा शुरू करने को लेकर सवाल उठाए। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है कि इफ्तार का आयोजन कई वर्षों से हो रहा है। आयोजन के विरोध में छात्रों ने कुलपति आवास पहुंच कर नारेबाजी की और कुलपति का पुतला भी फूंका। इस संबंध में वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच बातचीत हुई और छात्रों के दोनों गुटों को समझा दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब परिसर में पूरी तरह से शांति है। 

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उन्होंने कहा कि बुधवार शाम इफ्तार के बाद परिसर में कुछ छात्रों ने हंगामा किया था, आज दूसरे गुट के छात्रों ने परिसर की दीवारों पर विवादित नारे लिख दिए थे लेकिन पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन ने आज बैठक कर मामला शांत करा दिया और अब परिसर में पूरी तरह शांति है।      वहीं बृहस्पतिवार देर शाम इस संबंध में जारी आधिकारिक बयान में विश्वविद्यालय प्रशासन ने हंगामे को निंदनीय बताया और कहा, ‘‘पंडित मदन मोहन मालवीय के मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप स्थापित इस विश्वविद्यालय में किसी भी आधार पर, किसी के साथ भी भेदभाव का कोई स्थान नहीं है।’’     

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बयान में कहा है कि परिसर में रोजा-इफ्तार का आयोजन कई वर्षों से हो रहा है और उपलब्ध होने पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति हमेशा उसमें भाग लेते हैं।      उसमें कहा गया है, ‘‘महिला महाविद्यालय में रोकाा इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें कुलपति को आमंत्रित किया गया था। पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी की वजह से इसका आयोजन नहीं हो सका था। इस साल आयोजन में कुलपति समेत विभिन्न लोगों ने हिस्सा लिया।’’     

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महिला महाविद्यालय में बुधवार शाम आयोजित इफ्तार में कुलपति सुधीर जैन के साथ प्रोफेसर वी. के. शुक्ला, डॉ अफजल हुसैन, प्रोफेसर नीलम अत्रि, कार्यवाहक प्रधानाचार्य प्रोफेसर रीता सिंह, छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर के. के. सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर बी. सी. कापड़ी, डॉ. दिव्या कुशवाहा सहित महाविद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया था।      हालांकि, इफ्तार के आयोजन की जानकारी मिलने पर बुधवार रात ही छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। एक छात्र ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे आयोजन की कोई परंपरा नहीं रही है और कुलपति ऐसा करके नयी परंपरा को जन्म दे रहे हैं।   

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  विरोध प्रदर्शन पर विश्वविद्यानय प्रशासन का कहना है, ‘‘इसे लेकर विश्वविद्यालय का शैक्षणिक व सछ्वावपूर्ण वातावरण बिगाडऩे की कोशिश निंदनीय है।’’      इस घटना के बाद बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ब्राह्मण जाति और कश्मीर को लेकर विवादित नारे लिखे जाने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया।      यह नारे ‘भगत सिंह छात्र मोर्चा’ के नाम से लिखे गए थे। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवादित नारों को मिटवा दिया।      मौके पर पहुंचे चीफ प्रॉक्टर कापड़ी ने कहा, ‘‘यह विश्वविद्यालय का माहौल खराब करने के लिए लिखा गया है लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।’’   

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  नारों के नीचे लिखे गए संगठन के बारे में कापड़ी ने कहा, ‘‘नारों के नीचे जिस भगत सिंह छात्र संगठन का नाम लिखा गया है, उसके लोगों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने चिन्हित कर लिया है। जल्द से जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।’’      उधर, भगत सिंह छात्र मोर्चा ने इस संबंध में व्यक्तव्य जारी कर कहा, ‘‘इस तरह के नारों से भगत सिंह छात्र मोर्चा (बी सी एम) का कोई लेना देना नहीं है। हम विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले की जांच कर समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं।’’ 

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