Monday, Oct 22, 2018

JNU बनने जा रहा है E-Learning सेंटर, अब घर बैठे इस कोर्स की कर सकेंगे ऑनलाइन पढ़ाई

  • Updated on 10/11/2018

नई दिल्ली/प्रियंका सिंह। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में देश की प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में से एक है लेकिन देशभर से सिर्फ दो फीसदी छात्र ही जेएनयू में पहुंच पाते है। इसको देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने बचे हुए अन्य छात्रों तक ऑनलाइन कोर्स के जरिए पहुंचने की तैयारी कर रहा है।

दरअसल जेएनयू में ई-लर्निंग केंद्र बनाया जा रहा है। जो 2019 में तैयार हो जाएगा। ऐसे में लोग कम फीस में बेहतर शिक्षा का प्राप्त कर पाएंगे। ये बात काबिलेजिक्र है कि जेएनयू पहला एक ऐसा विश्वविद्यालय हैं, जो एमए इन संस्कृत कोर्स को ऑनलाइन शुरू करने जा रहा है।

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ज्ञात हो कि हाल ही में हुई अकादमिक परिषद की बैठक में तीन कोर्स को ऑनलाइन शुरु करने मंजूरी दे दी गई थी। इनमें एमए इन संस्कृत, सर्टिफिकेट ऑफ प्रोफिशिएंसी इन कप्यूटेंशनल लिंगस्टविक और प्रोफिशिएंसी इन पाली शामिल हैं।

ऑफिस ऑफ ई-लर्निंग के निर्देशक  प्रो. रविकेश ने बताया कि विश्वविद्यालय सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करना चाहते है। इसको देखते हुए जेएनयू की शिक्षा को देश के सभी वर्ग तक पहुंचाया जाए। ऐसे में जो भी व्यक्ति ज्ञान की वृद्धि करने के लिए सभी के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे। इस कोर्स का लक्ष्य यही है कि युवाओं का कौशल विकास किया जा सके। 

यूजीसी  नियम के आधार पर ही विश्वविद्यालय  में ई-लर्निंग कोर्स चलाया जाएगा। अभी तीन कोर्स ही जोकि ऑनलाइन शुरु किए जाएंगे। साथ ही और भी अन्य कोर्स को ऑनलाइन करने की तैयारी हो रही है। उन्होंने बताया कि ई-लर्निंग का पहला सत्र वर्ष 2019 के अगस्त माह तक शुरु हो जाएगा। 

एम फिल-पीएचडी छात्रों को टीचिंग का मिलेगा मौका
प्रो. रविकेश ने बताया कि इसमें विवि शिक्षक के साथ शोधार्थी भी शामिल होंगे। उन्होंने समझाया कि मान लीजिए कि हमारे पास एक हजार छात्र ऑनलाइन इनरोल हैं, तो इनके परीक्षा का पेपर चेक करना और इसमें करेक्शन एक शिक्षक नहीं कर पाएगा। ऐसे में दस छात्रों पर एक शोधार्थी को रखा जाएगा, जोछात्रों को गाइड करेगा।

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छात्र पूछ सकेंंगे लाइव सवाल 
प्रो. रविकेश ने बताया कि ऑनलाइन नामांकन छात्रों के लिए महीनें में एक बार लाइव लेक्चर किया जाएगा। ताकि छात्र अपने सवाल और शंकाएं शिक्षकों से पूछ सकें। इसके साथ-साथ ऑडियों के माध्यम से नामांकन छात्रों को पाठ्यक्रम सामग्री दी जाएगी। प्रो. रविकेश ने आगे बताया कि अभी तकनीकी सहायता के लिए इग्नू से मदद ली जाएगी। इसके साथ ही इस कोर्स को चलाने के लिए अभी अन्य संस्थानों से बात की जा रही है।

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