Sunday, Feb 28, 2021
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पीड़ित महिला पत्रकारों ने किया अकबर के इस्तीफे का स्वागत, बोलीं- लड़नी है अभी लंबी लड़ाई

  • Updated on 10/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर ने आज यानी बुधवार को #metoo कैंपेन के तहत आरोप लगने के बाद पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाने वाली कुछ महिला पत्रकारों ने बड़ी जीत बताई है साथ में यह भी कहा कि अकबर के इस्तीफे ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह दोषी हैं।

महिला पत्रकारों ने बुधवार को उनके इस्तीफे का स्वागत किया और कहा कि उन्हें आगे लंबी लड़ाई लड़नी है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में संपादक रहने के दौरान यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगने के बाद विदेश राज्यमंत्री अकबर ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। प्रिया रमानी ने कहा कि उन्हें उस दिन का इंतजार है जब अदालत में उन्हें न्याय मिलेगा। अकबर ने रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।

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उन्होंने कहा, अकबर के इस्तीफे से हमारे आरोपों की पुष्टि होती है। मुझे उस दिन का इंतजार है जब मुझे अदालत में भी न्याय मिलेगा। अकबर के खिलाफ आरोप लगाने वाली सुपर्णा शर्मा ने भी इस्तीफे का स्वागत किया। द एशियन एज अखबार की रेजिडेंट एडिटर ने पीटीआई को बताया, ‘यह हमारे लिए बड़ा क्षण है। मेरे आरोपों की पुष्टि होती है। हालांकि उनके दिल्ली पहुंचते ही यह कदम उठाया जाना चाहिए था लेकिन अब कम से कम शक्ति असंतुलन नहीं होगा और यह सरकार और रमानी के बीच लड़ाई नहीं होगी।

रमानी का समर्थन करने वाली मीनल बघेल ने अकबर के पद त्याग को लंबे समय से बकाया बताया जबकि लेखिका किरण मनराल ने कहा कि न्याय के लिए उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है। मुंबई मिरर की संपादक बघेल ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘यह अच्छा काम है और हम इसका स्वागत करते हैं। इस्तीफा पहले ही हो जाना चाहिए था।

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उन्होंने ट्वीट कर कहा, हम सबका समर्थन करने वाले सभी लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया। यौन उत्पीड़न के विरोध में सोशल मीडिया पर चलने वाले  #metoo अभियान में कई मीडिया संगठनों की महिला पत्रकारों ने अकबर पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाए थे। महिला कार्यकर्ताओं ने भी उनके इस्तीफे का स्वागत किया है। 

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि 20 महिलाओं के साहस और प्रतिबद्धता के कारण अकबर को देर से ही सही लेकिन पद छोड़ना पड़ा। महिला अधिकार कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने कहा कि अकबर को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने पहले इस्तीफा नहीं दिया। कार्यकर्ता मरियम धवाले ने कहा कि यह महिला आंदोलन की जीत है और अकबर के इस्तीफे की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। 

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