Friday, Dec 09, 2022
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काबुल के स्कूल में आत्मघाती बम विस्फोट, 100 बच्चों की मौत

  • Updated on 9/30/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक स्कूल में आत्मघाती बम विस्फोट में कम से कम 100 बच्चों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस घटना ने मानवीय संवेदनाओं को हिला कर रख दिया। स्कूल के आस-पास शवों को पहचानना भी मुश्किल हो रहा था। कहीं हाथ पड़े थे तो कहीं पैर।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विस्फोट शहर के पश्चिम में दश्त-ए-बारची इलाके में काज स्कूल में हुआ। एक स्थानीय पत्रकार, बिलाल सरवरी ने इस हमले पर ट्वीट किया, ‘हमने अब तक अपने छात्रों के 100 शवों की गिनती की है। मारे गए छात्रों की संख्या बहुत अधिक है। कक्षा खचाखच भरी थी। छात्र यूनिवर्सिटी में दाखिले की तैयारी के लिए जमा हुए थे।’

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घटना में मारे गए ज्यादातर छात्र हजारा और शिया समुदाय से थे। हजारा अफगानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा जातीय समूह है। सरवरी के मुताबिक, घायलों को एम्बुलेंस के जरिये अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘अली जिन्ना अस्पताल के एक डॉक्टर ने पुष्टि की है कि हम इस समय और अधिक घायलों को नहीं भर्ती कर सकते। हम रक्तदान की अपील कर रहे हैं।’ 

उन्होंने कहा, ‘काज हायर एजुकेशनल सेंटर के एक सदस्य मुझे बताया कि छात्र-छात्राएं एक बड़ी कक्षा के अंदर पढ़ रहे थे। तालिबान द्वारा लगाए गए एक अनिवार्य पर्दे से उन्हें अलग कर दिया गया था। पीड़ितों में लड़कियां भी शामिल हैं।’ 

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काज हायर एजुकेशनल सेंटर के एक शिक्षक ने घटना की भयावहता बयां करते हुए कहा कि छात्रों के कहीं हाथ पड़े थे तो कहीं पैर। उन्हें पहचानना भी मुश्किल है। छात्रों का कहना है कि वहां कम से कम 600 से ज्यादा छात्र-छात्राएं प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए जमा थे। 

अफगानिस्तान में पिछले साल ही तालिबान का शासन लौटा है। इससे यहां दो दशकों के युद्ध और एक लंबे हिंसा के दौर पर कुछ लगाम लगी थी लेकिन पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा के हालात यहां बिगड़ते जा रहे हैं। इसके पीछे कट्टर इस्लामिक संगठनों का हाथ बताया जा रहा है। 

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अफगानिस्तान के शिया हजारा कई दशकों से जान का खतरा झेल रहे हैं। पहली बार सत्ता में आने के बाद 1996 से 2001 के बीच तालिबान पर इस समूह को प्रताडि़त करने के आरोप लगे थे। दोबारा सत्ता में आने के बाद एक बार फिर तालिबान पर इसी तरह के आरोप लग रहे हैं।   

तालिबान और आईएस बनाता है निशाना: 
हजारा समुदाय को तालिबान का दुश्मन संगठन इस्लामिक स्टेट भी लगातार अपना निशाना बनाता रहता है। दोनों समुदाय इन्हें काफिर मानते हैं। पिछले साल तालिबान के सत्ता में लौटने से पहले दश्त-ए-बार्ची के एक स्कूल के पास हुए धमाके में कम से कम 85 लोग मारे गए थे. इनमें मुख्यतौर से छात्राएं शामिल थीं। इन तीन बम धमाकों में 300 लोग घायल हो गए थे।  

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