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नहीं थम रहा गर्मी का प्रकोप, सूरज सोख रहा शरीर से इलेक्ट्रोलाइट

  • Updated on 6/12/2019

नई दिल्ली/अंकुर शुक्ला।  राजधानी में आग उगलती हुई गर्मी इंसानी शरीर के लिए बहुत जोखिम भरी साबित हो रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का अब भी यह मानना है कि स्थिति अब भी नियंत्रण में है लेकिन जिस तरह से सोमवार को तापमान ने नया कीर्तिमान (48 डिग्री) बनाया है, उसे देखते हुए चिंता करने की जरूरत है। अस्पतालों में मरीजों की तादाद गर्मी के प्रभाव की गवाही दे रही है। डिहाईड्रेशन, बुखार, लू, मांशपेशियों में दर्द, रक्तचाप में कमी और सिरदर्द की शिकायत वाले मरीज लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक ध्यान देने की बात यह है कि तपिश और आग उलगलने वाली गर्मी ने इंसानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के स्तर को बिगाडऩा शुरू कर दिया है। 

सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक मेडिसिन विभाग के निदेशक और एचओडी डॉ. जुगल किशोर के मुताबिक अस्पताल आने वाले मरीजों के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का स्तर असामान्य पाया गया है। ऐसे में मरीजों में अचानक बेहोश होने की शिकायतें मिल रही है। इस परेशानी के होने पर मरीजों को तत्काल उपचार की जरूरत होती है। लापरवाही जोखिम भरा हो सकता है। अस्पताल में भर्ती कर इस तरह के मरीजों को नसों के माध्यम से तरल पदार्थ शरीर में पहुंचाया जाता है। 

क्या होता है इलेक्ट्रोलाइट 
इलेक्ट्रोलाइट्स मिनरल्स होते हैं जो मानव शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्य इलेक्ट्रोलाइट्स मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम और क्लोराइड होते हैं। ये इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर के अंगों को सक्रिय और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करता है और साथ ही मसल्स मूवमेंट और मस्तिष्क को सही तरह के कार्य करने में सहायता करता है। प्रत्येक इलेक्ट्रोलाइट की भूमिका भिन्न होती है। सोडियम शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है और सुनिश्चित करता है कि दिमाग सही तरीके से कार्य करे। जबकि इलेक्ट्रोलाइट पोटेशियम दिल की धड़कन को नियंत्रित करने के लिए काम करता है और न्यूरॉन कार्य करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा सही होने पर ही शरीर प्राकृतिक तरीके से सक्रिय रहता है। 

गर्मी ने थामी परिंदों की उड़ान
 राजधानी में तपती-जलती गर्मी से पक्षियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अभी तक सूरज से निकली तपिश जहां कबूतर और कौवों के लिए मुसीबत बनी हुुई थी, अब आसमान में विचरण करने वाली चीलें और बाजों के पंखों को भी घायल करने वाली साबित हो रही है। रिज और लालकिले के आसपास जंगलों में पंख फैलाकर अपनी मोहक अदा बिखेरने वाले मोरों पर भी गर्मी का असर इस कदर छाया है कि उनकी अदाएं उदासी और बेबसी में बदल गई हैं। 

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चांदनी चौक स्थित पक्षियों के अस्पताल में बीमार होकर लाए जाने वाले पक्षियों की तादाद बढ़ती जा रही है। सोमवार को रिकार्ड तोड़ गर्मी पडऩे के बाद अब पक्षियों के अस्पताल में बीमार कबूतर, कौवे, तोते, बतख और मोरों को लाया जा रहा है। अस्पताल के प्रबंधक सुनिल जैन के मुताबिक रोजाना अलग-अलग 90 पक्षियों को उपचार के लिए अस्पताल लाया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर पक्षी आंत में संक्रमण, डिहाईडे्रशन, कमजोरी, निष्क्रियता से पीड़ित हैं।  

अस्पताल में बढ़ रहे मरीज, बच्चों की संख्या अधिक
 इन दिनों छोट बच्चों की तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अस्पताल के निदेशक डॉ. बीएल शेरवाल ने बताया कि बढ़ते गर्मी के कारण मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं बात करें इमरजेंसी में तो 30 प्रतिशत मरीजों का इजाफा हो गया है। 

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