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चिन्मयानंद को बलात्कार पीड़िता के बयान की प्रति देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

  • Updated on 10/8/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बृहस्पतिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) का वह आदेश निरस्त कर दिया जिसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद (Chinmayanand) को उनके खिलाफ बलात्कार के मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये पीड़ित के बयान की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

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जस्टिस उदय यू ललित, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस एस रवीन्द्र भट की पीठ ने शाहजहांपुर की कानून की छात्रा की अपील पर उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कराये गये बयान की सत्यापित प्रति आरोपी नेता को दी जा सकती है। 

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न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया बयान मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्वीकार्य साक्ष्य है और यह जांच के दौरान पुलिस को दिये गये बयान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उच्च न्यायालय ने सात नवंबर, 2019 को निचली अदालत से कहा था कि पीड़ित महिला के बयान की प्रति पूर्व केन्द्रीय मंत्री को उपलब्ध करायी जाये। महिला ने भाजपा नेता पर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया है। 

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कानून की छात्रा की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 15 नवंबर को ही इस आदेश पर रोक लगा दी थी और राज्य सरकार तथा चिन्मयानंद से जवाब मांगा था। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस महिला के आरोपों की जांच के लिये आईजी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया था। 

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इस महिला ने चिन्मयानंद पर उसे परेशान करने के आरोप लगाये थे और इसके बाद वह लापता हो गयी थी। बाद में वह राजस्थान में मिली थी। विशेष जांच दल ने इस मामले में चिन्मयानंद को 21 सितंबर, 2019 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। कानून की इस 23 वर्षीय छात्रा पर भी कथित रूप से जबरन उगाही का मामला दर्ज किया गया था।

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