Friday, Dec 06, 2019
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प्रदूषण पर SC की फटकार, कहा- लोगों का दम घुट रहा है और दिल्ली में जारी है Blame-Game

  • Updated on 11/25/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में बढ़ते प्रदूषण (Pollution) मामले पर सुनवाई करेत हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से दिल्ली में चल रहे कारखानों के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा। साथ ही हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) सरकार को पराली जलाए जाने की घटनाओं में वृद्धि के लिए फटकार भी लगाई। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सीपीसीबी से राजधानी में चल रही फैक्ट्रियों की प्रकृति के बारे में विवरण दर्ज करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से पूछा कि स्टबल बर्निंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? आप जनता के साथ ये कैसे कर सकते हैं? कैसे उन्हें मरने के लिए छोड़ रहे हैं? और उन्हें मरने दें। हमें बताएं कि हमारे आदेश के बाद भी पराली जलाए जाने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं? स्टबल बर्निंग क्यों बढ़ गई? आप इसकी जांच क्यों नहीं करा रहे हैं क्या ये आपकी असफलता नहीं है? 

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पंजाब सरकार को SC ने फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से कहा कि हम इस प्रदूषण के लिए राज्य की हर मशीनरी को ज़िम्मेदार ठहराएंगे। आप इस तरह लोगों को मरने नहीं दे सकते। दिल्ली का दम घुट रहा है। क्योंकि आप उपायों को लागू करने में सक्षम नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर में लोगों को प्रदूषण से मर जाना चाहिए और कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो जाना चाहिए। 

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SC ने हरियाणा सरकार से पूछे ये सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से भी पूछा कि राज्य में पराली जलाए जाने की घटनाएं क्यों बढ़ी है? हरियाणा सरकार ने पहले पराली जलाए जाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए अच्छा काम किया था, लेकिन अब यह बढ़ गया है। पंजाब और हरियाणा कुछ नहीं कर रहे हैं। 

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लोगों को गैस चैंबर में रहने को किया जा रहा मजबूर
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "लोगों को गैस चैंबर में रहने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? उन सभी को एक बार में मारना बेहतर है, एक बार में 15 बैग में विस्फोटक लाएं और सभी को खत्म कर दें। लोगों को यह सब क्यों भुगतना चाहिए? इस स्थिति में भी दिल्ली में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के दौर को देख मैं हैरान हूं। 

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