Monday, May 17, 2021
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supreme court not required to sentence prashant bhushan says veerappa moily rkdsnt

कोर्ट का प्रशांत भूषण को सजा देना जरूरी नहीं था : पूर्व कानून मंत्री मोइली

  • Updated on 8/31/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्व कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली (Veerappa Moily) ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को सजा दिया जाना जरुरी नहीं था। उन्होंने कहा कि भूषण के खिलाफ मामले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजा जा सकता था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल और कई न्यायविदों और अधिवक्ताओं ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था कि उन्हें सजा ना दी जाए। 

मोइली ने कहा कि न्यायाधीशों को उनके खिलाफ आरोप लगाने वालों को सजा/दंड देने का काम खुद नहीं करना चाहिए। अवमानना मामले में न्यायालय द्वारा भूषण पर एक रुपये का जुर्माना लगाए जाने को लेकर मोइली ने कहा, 'ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी कोई जरूरत नहीं थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह प्राकृतिक न्याय के अनुरुप नहीं है। यह न्यायपालिका के उच्च मानदंडों के अनुरुप भी नहीं है।'

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ दो ट्वीट करने के मामले में दोषी भूषण को 15 सितंबर तक जुर्माने की राशि उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा करानी होगी। पीठ ने कहा कि जुर्माना भरने में असफल रहने पर दोषी को 3 महीने कारावास की सजा भुगतनी होगी और 3 साल तक वकालत करने पर प्रतिबंध रहेगा। 
 

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