Friday, Apr 19, 2019

मुलायम, अखिलेश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI को कोर्ट का नोटिस

  • Updated on 3/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के कथित मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच की स्थिति से उसे अवगत कराने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने मुलायम-अखिलेश के वकील की इस दलील को खारिज किया कि आगामी आम चुनावों को देखते हुए इस याचिका पर सीबीआई को नोटिस फिलहाल लंबित रखा जाए।

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शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा। अदालत ने कहा, ' (सीबीआई की 2007 की) स्थिति रिपोर्ट थी जिसमें कहा गया कि पहली नजर में मामला बनता है हम जानना चाहते हैं कि जांच का क्या हुआ।' सपा के वरिष्ठ नेता मुलायम और उनके बेटों अखिलेश एवं प्रतीक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम का अनुरोध ठुकराते हुए पीठ ने कहा, 'हम सीबीआई से क्यों नहीं पूछें कि 2007 में जारी आदेशों का क्या हुआ... हम जांच की स्थिति जानना चाहते हैं।' 

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वरिष्ठ वकील ने याचिकाकर्ता एवं कांग्रेसी नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी की याचिका का विरोध किया और कहा कि इसे अगले महीने प्रस्तावित आम चुनावों से पहले इसका इस्तेमाल राजनीतिक रूप से किया जा सकता है। चतुर्वेदी ने अपनी नई याचिका में तीनों सपा नेताओं के खिलाफ संपत्ति मामले में या तो शीर्ष अदालत या मजिस्ट्रेट अदालत के सामने जांच पर स्थिति रिपोर्ट रखने के लिए सीबीआई को निर्देश देने का अनुरोध किया। 

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चतुर्वेदी ने 2005 में शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर करके सीबीआई को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि मुलायम, अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल तथा प्रतीक के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिये उचित कार्रवाई की जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। 

शीर्ष अदालत ने एक मार्च 2007 को अपने फैसले में सीबीआई को ‘‘आरोपों की जांच करने’’ तथा यह पता लगाने का निर्देश दिया था कि सपा नेताओं की आय से अधिक संपत्ति से संबंधित याचिका ‘‘सही है या नहीं।’’ अदालत ने 2012 में मुलायम और उनके बेटों की इस फैसले के खिलाफ पुर्निवचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सीबीआई को इस मामले की जांच के क्रम में आगे बढऩे का निर्देश दिया था।

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हालांकि, अदालत ने डिंपल का अनुरोध स्वीकार करते हुए सीबीआई को उनका नाम जांच से हटाने का निर्देश दिया था और कहा था कि वह किसी सार्वजनिक पद पर काबिज नहीं थीं। अदालत ने एक मार्च 2007 के अपने आदेश में संशोधन किया था और सीबीआई से सरकार के सामने नहीं बल्कि अदालत के सामने स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा था। 

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चतुर्वेदी ने अपनी नई याचिका में कहा कि शिकायत दर्ज होने/ अदालत के निर्देश और इस संबंध में एक नियमित मामला दर्ज होने में अनिर्णय के बीच लंबा अंतराल रहा और 11 साल से इस मामले में किसी कार्रवाई के बिना असामान्य लंबा वक्त गुजर चुका है। नियमित मामला दर्ज करने के लिए यह विषय अब भी सीबीआई के सामने लंबित है। याचिका में कहा गया कि अब तक मुलायम-अखिलेश के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई और इससे न केवल पूरे मामले को अपूरणीय क्षति पहुंची बल्कि यह हमारी जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता एवं ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठे।

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इसमें कहा गया कि सीबीआई कानून के अनुसार नियमित मामला दर्ज करने तथा क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को प्राथमिकी की रिपोर्ट देने के लिए बाध्य है।         सीबीआई की पिछली स्थिति रिपोर्ट के संदर्भ में, नई याचिका में कहा गया कि इससे संकेत मिलते हैं कि न केवल मुलायम, अखिलेश और प्रतीक ने बल्कि ङ्क्षडपल ने भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। इसमें कहा गया कि आयकर रिटर्न और यादव परिवार के विश्वसनीय दस्तावेजों के आधार पर आय से अधिक संपत्ति करीब 2.63 करोड़ रुपये आंकी गई है।

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