आर्थिक आधार पर आरक्षण : सुप्रीम कोर्ट ने मांगा मोदी सरकार से जवाब

  • Updated on 2/11/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सोमवार को केन्द्र की मोदी सरकार को नोटिस जारी किया।

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश वेंगल ईश्वरैया और अन्य की याचिका पर केन्द्र को नोटिस जारी करने के साथ ही इसे भी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया। 

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इस याचिका में भी संविधान (103वां संशोधन) कानून, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में इस कानून को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए कहा गया है कि सिर्फ आॢथक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

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इससे पहले, गैर सरकारी संगठन जनहित अभियान, यूथ फार इक्वेलिटी और कांग्रेस समर्थक कारोबारी तहसीन पूनावाला भी इस संविधान संशोधन को शीर्ष अदालत में चुनौती दे चुके हैं। न्यायालय ने इस सभी याचिकाओं पर केन्द्र से जवाब मांगा है।

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