मुख्यमंत्री कार्यालय को लोकायुक्त दायरे में लाने को लेकर यूपी से मांगा जवाब

  • Updated on 2/11/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय को लोकायुक्त के दायरे में लाने के लिए कानून में संशोधन के वास्ते दिशा-निर्देश दिए जाने की मांग करने वाली याचिका पर सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा।

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शीर्ष अदालत याचिका का परीक्षण करने पर सहमत हो गई जिसमें राज्य के 43 वर्ष पुराने कानून ‘उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप लोकायुक्त कानून 1975’ में संशोधन करने के लिए राज्य सरकार को दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया गया है, जिससे कि भ्रष्ट गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को लोकायुक्त के दायरे में लाया जा सके।

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, 'नोटिस जारी कीजिए जिसका छह सप्ताह में जवाब दिया जाए।’’ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया कि लोकायुक्त कानून का मौजूदा स्तर लोकायुक्त को ‘‘उस उद्देश्य और लक्ष्य को पूरा करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं बनाता जिसके वास्ते इसे बनाया गया था।'

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याचिका में राज्य के विश्वविद्यालयों, निजी संस्थानों, कमेटियों, बोर्डो , और आयोग जैसे संस्थानों को भी लोकायुक्त कानून के दायरे में लाए जाने के लिए निर्देश दिए जाने की मांग की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोकायुक्त : उप लोकायुक्तों को स्वतंत्र पुलिस बल दिया जाना चाहिए जिसकी कमान लोकायुक्त के प्रशासनिक नियंत्रण में हो।     

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