Thursday, May 06, 2021
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supreme court on succession hindu woman can give her property to father family pragnt

उत्तराधिकार पर SC का बड़ा फैसला- हिंदू महिला पिता के परिवार को दे सकती है अपनी संपत्ति

  • Updated on 2/24/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बार फिर महिलाओं के हक को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। हिंदू महिलाओं की संपत्ति के उत्तराधिकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम ऐलान किया है। कोर्ट के मुताबिक, अब हिंदू महिला के मायके वालों का भी विवाहिता की संपत्ति पर हक होगा वो भी महिला के परिवार वाले ही माने जाएंगे।

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इस अधिनियम के तहत लिया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 15(1)(डी) महिला के उत्तराधिकारियों के तौर पर उसके पति को भी शामिल किया गया है। कोर्ट ने पिता को तो उत्तराधिकारी में शामिल कर दिया लेकिन उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि था महिला अपने भाई के बच्चों को संपत्ति दे सकती है।

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क्या है मामला?
मामला गुड़गांव के बाजिदपुर तहसील जिले का है। जहां पर एक बदूल नाम का एक शख्स रहता था जिसके दो बेटे थे- बाली राम और शेर सिंह। शेर सिंह निसंतान था और उसकी मृत्यु 1953 में हो गई। पति के मृत्यु के बाद शेर सिंह के हिस्से की जमीन उसकी विधवा जगनो को मिल गई। जिसके बाद जगनो ने अपनी जमीन अपने भाई के बेटों को दे दी। जिसके बाद दोनों लड़कों ने कोर्ट में शूट फाइल कर दिया। जिसपर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 19 अगस्त 1991 को डिक्री पारित कर दी। 

इस मामले में जगनो के देवर के लड़कों ने विरोध करते हुए कोर्ट में जमीन को लेकर एक मुकदमा दाखिल किया। जिसमें देवर के बच्चों ने कोर्ट से उस फैसले को रद्द करने की अपील की जिसमें कोर्ट ने जमीन पर जगनों के भाई के लड़कों का हक बताया है।

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SC तक पहुंचा मामला
निचली अदालत में मामला खारिज होने पर खुशीराम और उनके बच्चे हाई कोर्ट पहुंचे। जब वहां पर भी याचिका खारिज हो गई तो उन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं को देखते हुए कहा कि परिवार में नजदीकी रिश्तेदार नहीं आते हैं बल्कि वो लोग आते हैं जिनका थोड़ा सा भी मालिकाना हक बनता हो।

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निचली अदालत के फैसले को ठहराया सही
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि भाई के बच्चों को जमीन देना सही है। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम धारा 15(1)(डी) में महिला के पिता के उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है। वे लोग भी उत्तराधिकार प्राप्त कर सकते हैं।

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