Monday, Nov 28, 2022
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supreme court refuses to stay order to sack ips officer verma

सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी वर्मा को बर्खास्त करने संबंधी आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार

  • Updated on 9/28/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में मदद करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले बर्खास्त करने संबंधी केंद्र के आदेश पर रोक लगाने से बुधवार को इनकार कर दिया। वर्मा को 30 सितंबर को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले 30 अगस्त को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जब विभागीय जांच में उन्हें ‘‘मीडिया के साथ बातचीत’’ सहित विभिन्न आरोपों का दोषी पाया गया था। 

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न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है जिसने इस मुद्दे पर केंद्र के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।   पीठ ने कहा, ‘‘पक्षकारों के अधिवक्ताओं को सुना। हम याचिकाकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक की अवधि बढ़ाने से इनकार करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। यह एक अंतरिम आदेश है।’’ 

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पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं कि याचिका 22 नवंबर को उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की जाये। तब तक दलीलें पूरी हो जाएंगी। हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि इस मामले का शीघ्र निपटारा करे।’’  अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।  शुरुआत में, वर्मा के वकील ने कहा कि अधिकारी ने 36 साल की सेवा पूरी कर ली है और 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।  उन्होंने (वर्मा) आग्रह किया, ‘‘कम से कम, मुझे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने दो।’’ 

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तब पीठ ने कहा, ‘‘यदि आप न्याय के हकदार हैं, तो आपको यह जरूर मिलेगा। आपको कई कष्टों, समस्याओं से गुजरना पड़ा है लेकिन अगर सच्चाई आपके साथ है तो आपको न्याय मिलेगा। चिंता न करें। लेकिन हम इसे अभी नहीं कर सकते।’’ वर्मा ने अप्रैल 2010 और अक्टूबर 2011 के बीच 2004 के इशरत जहां मामले की जांच की थी। मुंबई के निकट मुंब्रा की रहने वाली इशरत और तीन अन्य 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक कथित मुठभेड़ में मारे गए थे। मृतकों को लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी करार दिया गया था, जिन पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर, एक विशेष जांच दल ने निष्कर्ष निकाला था कि मुठभेड़ ‘‘फर्जी’’ थी।     

गुजरात उच्च न्यायालय ने बाद में सीबीआई को मामले की जांच करने और वर्मा की सेवाओं का लाभ उठाने का निर्देश दिया था। यदि वर्मा की बर्खास्तगी प्रभावी हो जाती है, तो वह पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के हकदार नहीं होंगे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को आखिरी बार तमिलनाडु में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में महानिरीक्षक के रूप में तैनात किया गया था।      

 

 

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