Monday, Jan 24, 2022
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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मेडिकल दाखिले में EWS आरक्षण पर मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी 

  • Updated on 9/24/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस निर्देश को निरस्त कर दिया कि मेडिकल कॉलेजों की अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से पहले केंद्र को शीर्ष अदालत की मंजूरी लेनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने उन क्षेत्रों में प्रवेश करके ‘‘सीमाओं का उल्लंघन किया’’ जो इस मुद्दे से अलग थे। न्यायालय ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह 25 अगस्त को पारित उच्च न्यायालय के समूचे आदेश को रद्द नहीं कर रहा है या इसके गुण-दोष पर कोई राय नहीं रख रहा है बल्कि ईडब्ल्यूएस कोटा पर शीर्ष अदालत की मंजूरी के संबंध में की गई टिप्पणियों को खारिज कर रहा है। 

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जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक पार्टी द्वारा मुद्दे पर केंद्र द्वारा 27 जुलाई 2020 के आदेश का कथित पालन नहीं करने के लिए दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के समय इस तरह की राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए थी। पीठ ने कहा कि ‘‘हमारा स्पष्ट रूप से यह विचार है कि उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सीमाओं का उल्लंघन’’ किया। पीठ ने कहा कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद कि निर्णय (27 जुलाई 2020) का कोई उल्लंघन नहीं हुआ, उच्च न्यायालय के आदेश में बाकी चर्चा अवमानना याचिका के उद्देश्य के लिए अनावश्यक थी। पीठ ने कहा ‘‘इसलिए हम मानते हैं कि उच्च न्यायालय द्वारा पैराग्राफ में जारी किया गया निर्देश अवमानना क्षेत्राधिकार के प्रयोग से अलग है और इसलिए इसे निरस्त कर दिया जाएगा।’’ 

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शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देश (ईडब्ल्यूएस कोटा के संबंध में) योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि इस आधार पर अलग रखे जाते हैं कि इस तरह के निर्देश ने अवमानना क्षेत्राधिकार की सीमा का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत के समक्ष 29 जुलाई की अधिसूचना (मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए नीट में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण) को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हम उन दलीलों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं जो निर्णय के लिए इस अदालत के समक्ष लंबित याचिकाओं में दी गई हैं।’’ सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र को पांच न्यायाधीशों की पीठ की मंजूरी लेने के लिए कहा जो 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटा प्रदान करने वाले 103वें संवैधानिक संशोधन की वैधता के लिए की गई चुनौती पर सुनवाई करेगी।’’ 

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शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ केंद्र की अपील का निपटारा कर दिया। पीठ ने कहा कि वह मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए नीट दाखिले में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाली केंद्र की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सात अक्टूबर को सुनवाई करेगी। कुछ उम्मीदवारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दत्तार ने कहा कि वे 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने के अलावा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए निर्धारित आठ लाख रुपये प्रति वर्ष की आय सीमा की वैधता पर सवाल उठाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने इस शैक्षणिक वर्ष के लिए कोटा लागू नहीं करने को लेकर कुछ अंतरिम राहत का अनुरोध किया। 

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शीर्ष अदालत ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज को छह अक्टूबर तक याचिकाओं पर एक संयुक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि वह इस मामले की सुनवाई सात अक्टूबर को करेगी। केंद्र ने 29 जुलाई को स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा, दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों (एमबीबीएस, एमडी, एमएस, डिप्लोमा, बीडीएस, एमडीएस) के लिए अखिल भारतीय कोटा कार्यक्रम में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया था। पूर्व के आदेशों की तामील नहीं होने के लिए केंद्र के खिलाफ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पार्टी की अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए 25 अगस्त को मद्रास उच्च न्यायालय ने एआईक्यू के तहत केंद्रीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए ओबीसी उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के संबंध में अधिसूचना को मंजूरी दे दी थी। 

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हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा था कि ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण के माध्यम से और 10 प्रतिशत को शामिल करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की आवश्यकता होगी और 29 जुलाई की अधिसूचना के अनुरूप ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण को ऐसी स्वीकृति प्राप्त होने तक अस्वीकार्य माना जाना चाहिए। केंद्र ने उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी के खिलाफ तीन सितंबर को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने एआईक्यू के तहत केंद्रीय मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए ओबीसी उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाली केंद्र की अधिसूचना को मंजूरी दे दी थी।


 

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