Wednesday, Nov 20, 2019
supreme court says no restriction on construction mumbai metro car shed project at aarey colony

आरे कालोनी में मेट्रो परियोजना पर रोक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

  • Updated on 10/21/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि आरे कोलीनी में मुंबई मेट्रो कार शेड परियोजना के निर्माण पर कोई रोक नहीं है और यथास्थिति बनाये रखने संबंधी उसका आदेश सिर्फ पेड़ों की कटाई पर लागू है। शीर्ष अदालत ने बृहन्न मुंबई नगर निगम को निर्देश दिया कि मुंबई के इस प्रमुख हरित क्षेत्र में पेड़ों की कटाई, उनके स्थान पर लगाये गये वृक्ष और वृक्षों को अन्यत्र लगाने के बारे में स्थिति रिपोर्ट पेश की जाये। 

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न्यायमूॢत अरूण मिश्रा और न्यायमूॢत दीपक गुप्ता की पीठ को बीएमसी की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि आरे कालोनी में अब और पेड़ों की कटाई नहीं हो रही है तथा शीर्ष अदालत के पहले के आदेश के अनुरूप यथास्थिति बनाये रखी जा रही है। वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के लिये जनहित याचिका दायर करने वाले कानून के छात्र के वकील ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र से पेड़ों की सफाई करने के नाम पर परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। 

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इस पर पीठ ने स्पष्ट किया, ‘‘मेट्रो कार शेड परियोजना पर कोई रोक नहीं है। यथास्थिति बनाये रखने संबंधी हमारा अंतरिम आदेश पेड़ों की कटाई के संबंध में है।’’ पीठ ने कहा कि पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने संबंधी आदेश अगले आदेशों तक जारी रहेगा। शीर्ष अदालत ने बीएमसी से कहा कि आरे वन क्षेत्र में प्रस्तावित गतिविधियों के बारे में अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करे। पीठ ने कहा कि बीएमसी की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का जवाब देने के लिये समय देने का अनुरोध किया है। 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि हमने सालिसिटर जनरल से अनुरोध किया है कि आरे वन क्षेत्र में प्रस्तावित अन्य गतिविधयों की जानकारी पेश करें। क्या वहां किसी इमारत का निर्माण करने की भी परियोजना है। न्यायालय ने मुंबई मेट्रो को भी इस क्षेत्र में वनीकरण, पेड़ों को अन्यत्र लगाने और लगाये गये पेड़ों की परिधि और ऊंचाई तथा इलाके में पेड़ों की कटाई के बारे में 15 नवंबर तक तस्वीरें पेश करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि ये सारी जानकारी एक हलफनामे पर दी जाये। इसमें यह भी स्पष्ट किया जाये कि अन्यत्र लगाये गये वृक्षों के जीवन की दर क्या है और अभी तक इसमें से कितने वृक्ष बचे हैं। 

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मुंबई मेट्रो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने पांच हजार से अधिक वृक्ष अन्यत्र लगाये हैं और इस इलाके में यथास्थिति का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। उन्होंने इन आरोपों को फिजूल बताया कि वन क्षेत्र में एक कालोनी का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘वहां सिर्फ मेट्रो कार शेड परियोजना ही है। कोई भवन परियोजना नहीं है।’’ रोहतगी ने मेट्रो नेटवर्क के महत्व को इंगित करते हुये कहा कि दिल्ली मेट्रो से रोजाना 60 लाख से अधिक यात्री यात्रा करते हैं और इस वजह से करीब सात लाख वाहन सड़क से हट गये हैं। इससे वायु प्रदूषण में कटौती करने में भी मदद मिली है। 

इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि दिल्ली और उच्चतम न्यायालय में भी बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण है। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विज ने कहा कि अन्यत्र ले जाये गये वृक्षों के बचने की उम्मीद काफी कम होती है। इस पर पीठ ने कहा कि मुंबई मेट्रो इनकी तस्वीर पेश करेगी। शीर्ष अदालत ने सात अक्टूबर को कानून के छात्र के पत्र को जनहित याचिका में तब्दील करते हुये आरे कालोनी में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था।

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शीर्ष अदालत ने वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के लिये कानून के छात्र रिशव रंजन द्वारा प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को भेजे गये पत्र को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था।      बंबई उच्च न्यायालय ने चार अक्टूबर को आरे कालोनी को वन घोषित करने और इस हरित क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिये 2600 से अधिक वृक्षों की कटाई की अनुमति देने का मुंबई नगर निगम का फैसला निरस्त करने से इंकार कर दिया था।
 

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