Tuesday, Nov 29, 2022
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surgical miracle: gayatri becomes mahesh and then marries shalini

सर्जिकल चमत्कारः गायत्री बनी महेश फिर रचाई शालिनी से शादी

  • Updated on 11/22/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पहले वह गायत्री थी और फिर महेश बनकर उसने शालिनी से विवाह किया। यह कोई कहानी नहीं बल्कि एकदम सौ फीसदी सच है और यह कमाल सर्जिकल चमत्कार से संभव हो पाया है। मेडिकल कारीगरी का यह हैरान करने वाला नमूना दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सर्जनों ने कर दिखाया है।

उत्तर प्रदेश की निवासी 34 वर्षीय गायत्री महिला शरीर में खुद को असहज महसूस कर रही थी। वह पुरुष बनना चाहती थी। अपनी इस चाहत को हकीकत में बदलने के लिए गायत्री ने हर जानकारी जुटानी शुरू कर दी। इसी क्रम में उसे पता चला कि जैसा वह सोच रही है, वैसा हकीकत में भी संभव है। अपने पुरुष बनने की चाहत लिए गायत्री दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुंची।

चिकित्सकों ने गायत्री से बातचीत के बाद उसकी जांच शुरू की और फिर यह पाया कि उसका शरीर महिला का जरूर है लेकिन वह मानसिक रूप से पुरुष है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को जेंडर डिस्फोरिया कहा जाता है।
डिपार्टमेंट ऑफ प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. भीम सिंह नंदा ने बताया कि उन्होंने टिश्यू ट्रांसफर की अत्याधुनिक माइक्रो- सर्जिकल तकनीक द्वारा पूर्ण पुरुष परिवर्तन के लिए शिश्न (पुरुष लिंग) को महिला के हाथ पर पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्ट) करने का फैसला किया।

उनका उद्देश्य रोगी को अच्छा आकार, लंबाई, मूत्रमार्ग (पेशाब करने के लिए) और कामुक संवेदना देना था। सभी तकनीकों में से डॉक्टरों ने शिश्न (लिंग) पुनर्निर्माण के लिए हाथ और कलाई (फोरआर्म) को डोनर के रूप में चुना। यह एक चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी क्योंकि शिश्न (लिंग) को बांह की कलाई पर धमनियों और सभी महत्वपूर्ण नसों को बचाते हुए रीकंस्ट्रक्ट करना था।

इसके बाद अगला कदम पुनर्निर्मित लिंग को मरीज के गुप्तांग की जगह में प्रत्यारोपित करना था। डॉ. नंदा ने बताया कि दूसरी चुनौती नए अंग को मूत्रमार्ग (मूत्रनली) से जोड़ना था और फिर से बनाए गए लिंग में रक्त के प्रवाह को फिर से शुरू करने के लिए धमनियों को जोडऩा था। अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कदम पुनर्गठित लिंग को उत्तेजना प्रदान करने वाले नसों के साथ जोड़ना था, जो बाद में लिंग प्रत्यारोपण और यौन संतुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूर्व- आवश्यकता है।

डॉक्टर के मुताबिक यह एक सफल सर्जरी थी, जिसमें न्यूनतम खून का नुकसान हुआ और पूरी प्रक्रिया में 8 घंटे लगे। सर्जरी के 6 हफ्ते बाद मरीज पूरी तरह से पुरुष में तब्दील हो चुकी है। नया अंग पूरी तरह काम कर रहा है। गायत्री अब महेश बन चुकी है और पुरुषों की तरह सभी व्यवहार कर सकती है अब उसकी शादी भी हो चुकी है।

सर्जरी के माध्यम से पहले से ही प्रजनन अंगों से पा चुकी थी निजात
गायत्री के मन में पुरुष बनने की चाहत इतनी प्रबल थी कि वर्ष 2017 से 2019 में उसने सर्जरी के माध्यम से स्तन, गर्भाशय, अंडाशय और योनि को हटवा दिया था, जबकि वह वर्ष 2016 से ही पुरुष हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर थी।

सर गंगा राम अस्पताल में पहुंचने के समय, गायत्री में वह सभी लक्षण पाए गए जो अमूमन पुरुषों में होता है। उसकी दाढ़ी थी, छाती पर बाल, पुरुषों वाली आवाज और पुरुषों जैसे व्यवहार थे।

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