Saturday, Mar 25, 2023
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सर्वे- लॉकडाउन में 67% मजदूरों का गया रोजगार, 74% लोग आधा पेट भूखा रहने को विवश

  • Updated on 5/13/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस के कारण अब तक लाखों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग इससे ग्रसित हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा अगर किसी का नुकसान हुआ है तो वो है गरीब, मजदूर जनता का।

भारत में भी कोरोना महामारी की वजह से लाखों मजदूर अपने घरों से दूर भुखमरी और लॉकडाउन का शिकार हो गये। इस बीच हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं, सैंकड़ों की जान चली गई और कईयों ने पैदल चलते हुए दम तोड़ दिया।

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क्या है ये सर्वे
इसी बीच अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सतत रोजगार के लिए केंद्र (CSE) ने 10 नागरिक सामाजिक समूहों की मदद से एक सर्वे कराया है जिसने लॉकडाउन के दौरान गये रोजगार और कंगाली से जुड़ें कई प्रमाण पेश किए हैं।

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क्या कहता है सर्वे
इस सर्वे के अनुसार, लॉकडाउन के बीच 67% लोगों की नौकरी चली गई है। ये पूरी आबादी का दो तिहाई हिस्सा है। इतना ही नहीं ये सर्वे कहता है कि शहरों में 10 में से 8 मजदूर और गांव में 10 में से 6 श्रमिक का रोजगार छीन लिया गया। इससे भी बड़ी दुखद बात यह है कि लॉकडाउन के कारण 74% लोग ऐसे हैं जिनके पास उनकी जरूरत के हिसाब से खाना भी उपलब्ध नहीं है।

वहीँ, इस सर्वे में यह भी पता लगा है कि इसमें 61% परिवारों के पास इतने पैसे भी नहीं है कि वो हफ्ते भर का राशन भी अपने परिवार के लिए खरीद सकें।

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ये राज्य के लोग हुए शामिल
इस सर्वे में 13 अप्रैल से 9 मई के बीच 4 हजार लोगों से बातचीत कर ये सर्वे पूरा किया गया है। इसमें झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, यूपी, पश्चिम बंगाल राज्य को शामिल किया गया। इस सर्वे में रोजगार और सरकारी योजनाओं की मौजूदा हालत जानने के लिए ये सर्वे किया गया।  

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लोगों की सेहत पर पड़ा असर
वहीँ इस लॉकडाउन के बीच हुए सर्वे में यह भी बात सामने आई है कि इस दौरान लोगों का स्वास्थ्य भी गिरा है। उनके पास खाने को नहीं है। पैसे नहीं है। उन्हें काम छीन चुके हैं, ठप पड़े हैं। बंद हो गये हैं। ये लोग रोजाना के सामान खरीद सकें इनके पास इतने भी पैसे नहीं हैं। लोग बेहद कम खाना खाकर अपने दिन गुजार रहे हैं। इससे आगे जाकर अधिक समस्या उत्पन्न होंगी। बच्चे कुपोषित होंगे, लड़कियां अधिक प्रभावित होंगी।

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सरकार की घोषणा
इस बीच कल मंगलवार को पीएम मोदी ने आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की है। हालांकि अभी ये पता नहीं लगा है कि इस 20 लाख करोड़ की रकम को कैसे और किस तरह से खर्च किया जाएगा। लेकिन यह पीएम ने जरूर बताया कि इसे गरीबों और मजदूरों के कल्याण में भी इस्तेमाल किया जायेगा।

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