Wednesday, Jan 29, 2020
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स्मृति शेष: सुषमा स्‍वराज की सियासी जिंदगी से जुड़े ये हैं 10 चर्चित किस्से

  • Updated on 8/7/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज अब इस दुनिया में नहीं रहीं। सुषमा भाजपा की ऐसी नेता थीं, जिन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत से चुनाव लड़ा था। साथ ही वह एक शानदार वक्‍ता भी थीं। वह अकेली महिला सांसद थीं, जिन्हें असाधारण सांसद का अवार्ड मिला। 14 फरवरी, 1952 को हरियाणा के अम्बाला कैंट में जन्मी स्वराज का भाजपा में बड़ा कद था। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह विदेश मंत्री थीं, लेकिन दूसरे कार्यकाल में उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इस तरह वह राजनीति से भी दूर हो चली थीं। 

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सुषमा के पिता आरएसएस के खास सदस्य थे। सुषमा ने अम्बाला के एसएसडी कॉलेज से बीए किया और चंडीगढ़ से कानून की डिग्री हासिल की। 1973 में उन्होंने हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उनकी शादी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से हुई। सुषमा स्‍वराज की इकलौती संतान बांसुरी कौशल हैं, जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक और इनर टेम्पल से बैरिस्टर की डिग्री ले चुकी हैं। 

सुषमा स्वराज ने अपने सियासी सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की। वे प्रखर वक्ता थीं। 1977 में सुषमा को 25 की उम्र में राज्य का कैबिनेट मंत्री बनाया गया और 27 की उम्र में वे प्रदेश भाजपा की प्रमुख बनीं। स्वराज 6 बार सांसद, 3 बार विधायक और 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं। वे केन्द्रीय मंत्री के अलावा दिल्ली की सीएम भी रहीं। उन्होंने आपातकाल के विरोध में जमकर भाग लिया। 1977 में उन्हें चौधरी देवीलाल की कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। 

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सुषमा अप्रैल 1990 में सांसद बनीं थीं और 1990-96 के दौरान राज्यसभा की मेंबर रहीं। 1996 में वे 11वीं लोकसभा के लिए चुनी गई और वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहीं। 12वीं लोकसभा के लिए वे फिर दक्षिण दिल्ली से सिलेक्ट हुई और पुन: उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय के अलावा दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला।

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1998 में उन्होंने केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। बाद में जब विधानसभा चुनावों में भाजपा हार गई तो वे राष्ट्रीय सियासत में लौट आईं। 1999 में उन्होंने आम चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी संसदीय क्षेत्र चुनाव लड़ा, लेकिन वे पराजित हुईं। 2000 में वे फिर से राज्यसभा में पहुंचीं थीं और उन्हें फिर से सूचना प्रसारण मंत्री बनीं। मई 2004 तक भाजपा सरकार में रहीं। 

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