swami vivekananda''''''''s death anniversary today, let''''''''s know his precious ideas

भारतीय संस्कृति को नई पहचान देने वाले विवेकानंद के ये हैं कुछ अनमोल विचार

  • Updated on 7/4/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटलः दुनिया भर में भारतीय संस्कृति(Indian culture) को पहचान दिलाने वाले भारत के महान आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda) की आज पुण्यतिथि है। उन्होंने अपना पूरा जीवन ब्राह्मणवाद और धार्मिक कर्मकांड जैसी सामाजिक विसंगतियों को दूर करने में समर्पित कर दिया। आज से ठीक 117 साल पहले उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके विचार और उनका अस्तित्व आज भी जीवित है। यही कारण है कि उनका जीवन हर किसी के लिए एक प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।

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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। वैसे तो उनका असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था, लेकिन उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें ‘स्वामी विवेकानंद’ का नाम दिया। स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित ‘विश्व धर्म सम्मेलन’ ( Parliament of the World’s Religion) में अपने भाषण से सभी को हैरानी में डाल दिया था। उन्होंने भारत की ओर से सनातन धर्म (Hinduism) का प्रतिनिधित्व किया था। 

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पश्चिमी देशों को वेदांत और योग के बारे में जाग्रत कराने का योगदान स्वामी विवेकानंद को ही जाता है। 19वीं शताब्दी में हिंदू धर्म का प्रचार करके स्वामी विवेकानंद ने इसे एक मुख्य धर्म के रूप में पहचान दिलाई। एक समाज सुधारक के तौर पर स्वामी विवेकानंद ने ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की, जो आज भी अपना काम कर रहा है।

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स्वामी विवेकानंद के विचार
- उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
- एक समय में एक ही काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो।
- खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
- जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत भी उतनी ही शानदार होगी।
- सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, लेकिन फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
- ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका अविष्कार करता है।
- जब दिल और दिमाग में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो, तो दिल की सुनो।
- किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। 
- लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या किसी अन्य युग में, तुम न्याय पथ से कभी भ्रष्ट मत होना।

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