Thursday, Mar 21, 2019

करतारपुर गलियारे पर भारत- PAK के बीच बातचीत शुरू, हो सकता है अहम फैसला

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और पाकिस्तान करतारपुर गलियारा बनाने के लिए तौर- तरीकों को अंतिम रूप देने के वास्ते बृहस्पतिवार को पहली बार मिले। दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू हो गई है। इससे पहले चर्चा के लिए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अटारी- वाघा बॉर्डर पहुंचा जहां दोनों पक्षों में बातचीत होगी।     

यह बैठक अटारी- वाघा सीमा पर भारत की तरफ हो रही है। माना जा रहा है कि नई दिल्ली की ओर से पाकिस्तान जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों की बाधा रहित यात्रा की बात रखी जा सकती है। इस्लामाबाद से यह भी कहा जा सकता है कि वह तीर्थयात्रियों को खालिस्तानी अलगाववादियों के प्रोपेगेंडा से बचाए।  

यह गलियारा पाकिस्तानी शहर करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारतीय पंजाब के गुरदासपुर जिले से जोड़ेगा। इस परियोजना पर दोनों देशों द्वारा सहमति जताने के तीन महीने बाद यह बैठक हो रही है।

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 पिछले साल पाकिस्तान में दो सिख गुरुद्वारों की ओर जाते हुए भारतीय तीर्थयात्रियों को खालिस्तान समर्थक बैनर दिखाए जाने की रिपोर्टें हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय शिष्टमंडल में केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बीएसएफ, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण और पंजाब सरकार के नुमाइंदे होंगे। बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक को कवर करने के लिए आना चाह रहे पाकिस्तानी पत्रकारों को वीकाा देने से इनकार करने पर सूत्रों ने कहा कि यह कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं है जिसे प्रचार की जरूरत हो।      

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करतारपुर परियोजना के लिए भारतीय अधिकारियों की पाकिस्तान की यात्रा के बारे में सूत्रों ने बताया कि यह बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक के नतीजों पर निर्भर करता है।      गौरतलब है कि भारत द्वारा पाकिस्तान में घुस कर जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों पर हवाई हमले करने और उसके बाद पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों मुल्कों के मध्य बढ़े तनाव के बीच यह बैठक हो रही है।      

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सूत्रों ने संकेत दिया कि भारत पाकिस्तान से अपील कर सकता है कि वह भारतीय तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारे तक बिना पासपोर्ट और वीकाा के जाने की इजाकात दे। पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोडऩे के लिए गलियारा बनाने को सहमत हुए थे। करतारपुर में सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपना अंतिम समय बिताया था।     

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