Monday, Nov 28, 2022
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फीस वृद्धि को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों की बातचीत बेनतीजा 

  • Updated on 10/4/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि वापस लेने की मांग के साथ आंदोलन कर रहे छात्रों की मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रही। छात्रों ने आंदोलन को और वृहद रूप देने की चेतावनी दी है। छात्र संघ के उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ करीब ढाई घंटे चली बैठक पूरी तरह विफल रही। उन्होंने बताया कि इस बैठक में 20 छात्र शामिल हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस वार्ता में कुलपति शामिल नहीं थीं।   

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  उन्होंने बताया कि छात्रों की इस वार्ता में दो सूत्री मांग- पहली 300 प्रतिशत फीस वृद्धि को वापस लेने और दूसरी छात्र संघ को बहाल करने की थी। इन दोनों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुप्पी साधे रखी। यादव ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से वार्ता में जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, आईजी और एसएसपी शामिल नहीं थे, बल्कि सिटी मजिस्ट्रेट, एसीएम, एसपी सिटी और क्षेत्राधिकारी ही वार्ता में जिला प्रशासन की ओर से आए। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस वार्ता में चेयरपर्सन के तौर पर प्रोफेसर अनामिका राय, रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, चीफ प्राक्टर, डीएसडब्लू शामिल हुए।   

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  अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘अब हम आंदोलन का स्वरूप और वृहद करेंगे और इस आंदोलन को अन्य विश्वविद्यालयों में भी लेकर जाएंगे।’’ जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय में चल रहे गतिरोध को दूर करने की दिशा में रविवार को आंदोलनकारी छात्रों की कलेक्ट्रेट में एक बैठक बुलाई थी जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ चार अक्टूबर को छात्रों की वार्ता कराने की बात कही गई थी।   

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  हालांकि मंगलवार को हुई इस बैठक में जिला प्रशासन की ओर से किसी वरिष्ठ अधिकारी का मौजूद नहीं होना, अपने आप में इस बैठक को लेकर प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक स्तर की शिक्षा की फीस प्रति छात्र 975 रुपये प्रतिवर्ष थी जिसे हाल ही में 300 प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर 4,151 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है। छात्र फीस वृद्धि के खिलाफ पिछले 28 दिन से आंदोलन कर रहे हैं।

 

 

 


 

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