Friday, Jan 21, 2022
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तपोवन-रैंणीः रेस्क्यू अभियान में जागी उम्मीद,टनल में ड्रिल करने में मिली कामयाबी

  • Updated on 2/13/2021

गोपेश्वर/ब्यूरो। उत्तराखंड के चमौली में बीती सात फरवरी से आपदा से प्रभावित तपोवन-रैंणी क्षेत्र में सातवें दिन शनिवार को कुछ राहत की उम्मीद जागी है। एक ओर जहां तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की क्षतिग्रस्त टनल तक पहुंचने के लिए रेसक्यू टीम को ड्रिल करने में कामयाबी हासिल हुई है। बीते वीरवार को यहां टनल तक पहुंचने के लिए किया जा रहा ड्रिल का कार्य चट्टान आ जाने से रोक दिया गया था। वहीं, दूसरी ओर ऋषिगंगा नदी पर बनी झील से कोई खतरा नहीं होने की भी बात जांच में सामने आई है।

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आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि टनल में निर्धारित ड्रिलिंग कार्य किया जा रहा है। यहां रेस्क्यू टीम की ओर से 75 एम.एम. व्यास में 12 मीटर तक ड्रिल की गई है। ड्रिल कार्य पूर्ण होने के बाद छेद से कैमरे को दूसरी ओर डालकर अंडरग्राउंड टनल की सही स्थिति का जायजा लिया जाएगा। ड्रिल करने से आ रहे कीचड़ को देखते हुए रेस्क्यू टीम इसकी गोलाई बढ़ाने को लेकर विचार कर रही है।

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वहीं गढ़वाल विवि की टीम की ओर से ऋषिगंगा के उद्गम क्षेत्र में बन रही झील की जानकारी मिलने के बाद झील के निरीक्षण पर गई एस.डी.आर.एफ. टीम ने झील से किसी प्रकार का खतरा न होने की बात कही है। पुलिस उप महानिरीक्षक व पुलिस प्रवक्ता नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि यहां 350 मीटर की लम्बाई में एकत्रित पानी ने झील का रूप धारण किया है, लेकिन झील से पानी का रिसाव धीरे-धीरे हो रहा है। इसमें खतरे की कोई बात नहीं है। उधर, शनिवार को सर्च अभियान में किसी लापता व्यक्ति की बरामदगी नहीं हुई है।

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पर्यटन एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि त्रासदी के बाद ऋषि गंगा नदी पर बनी झील से अब पानी का रिसाव शुरू हो गया है। इसलिए अब किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। एक-दो दिन के अंदर स्थिति सामान्य हो जाएगी। वाडिया भूगर्भ के विज्ञानी रिमोट सेंसिंग के माध्यम से झील की पल-पल की स्थिति पर निगाहें रखे हुए हैं। ऋषि गंगा कृत्रिम झील पर ड्रोन के माध्यम से भी नजर रखने को कहा गया है।

 

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